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Lucknow News: घुटने के दर्द में ट्रांसफार्मर का तेल लगा रहे मरीज, मर्ज बढ़ने पर पहुंचते हैं डॉक्टर के पास

Mon, 31 Aug 2026 02:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 02:29 AM IST
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Patients are applying transformer oil to treat knee pain; they visit a doctor only when the condition worsens.
कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।
लखनऊ। घुटने में दर्द होने पर कई मरीज डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय लंबे समय तक ट्रांसफार्मर का जला तेल लगाते रहते हैं। कमर या हड्डी में चोट लगने पर भी घरेलू लेप और दूसरे देसी नुस्खे आजमाते हैं। बीमारी बढ़ने या दर्द असहनीय होने पर ही डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले छह में से करीब चार मरीजों का यही पैटर्न सामने आ रहा है। मरीज पहले एक या अधिक देसी नुस्खे आजमाते हैं और बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाएं भी लेते रहते हैं।
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यह जानकारी केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने रविवार को केजीएमयू ऑर्थोपेडिक्स विभाग और उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन की कार्यशाला में दी।
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डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर के मरीज कई तरह के नुस्खे आजमाने के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। इनमें ट्रांसफार्मर का तेल लगाने से लेकर जानवरों की चर्बी, उड़द की दाल, चूना और शहद के मिश्रण का इस्तेमाल तक शामिल है। उन्होंने कहा कि ट्रांसफार्मर का तेल विद्युत उपकरणों में इस्तेमाल होने वाला औद्योगिक उत्पाद है। इसे शरीर पर लगाना किसी आर्थोपेडिक बीमारी का प्रमाणित उपचार नहीं है।
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कार्यशाला के सचिव डॉ. मयंक ने कहा कि लंबे समय के दर्द को केवल दवा लेकर दबाना ठीक नहीं है। दर्द हड्डी, जोड़, कार्टिलेज, लिगामेंट या अन्य मुलायम ऊतकों की समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए दर्द के कारण का पता लगाकर उपचार जरूरी है। डॉ. शैलेंद्र सिंह ने लंबे समय तक डॉक्टर की निगरानी के बिना दर्द निवारक दवाएं लेने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी नुस्खे का वर्षों से चलन में होना उसकी वैज्ञानिक प्रभावशीलता की गारंटी नहीं है।
डॉ. देवरशी रस्तोगी ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकता है। कई मरीजों में मामूली गिरने या चोट के बाद फ्रैक्चर होने पर बीमारी का पता चलता है।
रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण में अधिक सटीकता
डॉ. मयंक महेंद्र ने बताया कि रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण में कम्प्यूटर तकनीक की मदद से सर्जरी की योजना अधिक सटीक तरीके से बनाई जाती है। इससे हड्डियों की कटिंग और इम्प्लांट की पोजिशन में बेहतर सटीकता मिल सकती है। इम्प्लांट का संतुलन बेहतर होने से घुटने की प्राकृतिक गति में मदद मिलती है और रिकवरी अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।
घुटने के दर्द में सिर्फ दवा इलाज नहीं
ऑस्टियोआर्थराइटिस में वजन नियंत्रण, नियमित व्यायाम, फिजियोथेरेपी और जरूरत के अनुसार दवा मददगार है। कुछ मरीजों में हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

इन लक्षणों को न टालें
चोट के बाद लगातार दर्द, जोड़ में सूजन, चलने में परेशानी या हाथ-पैर पर वजन डालने में दिक्कत होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सक।

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