लखनऊ मेट्रो की रफ्तार में आ रहे हैं ये रोड़े
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मेट्रो रेल परियोजना की रफ्तार में कई सरकारी विभाग व एजेंसियां रोड़ा बन गई हैं। एक तरफ निजी जमीनों की खरीद के लिए गठित अर्जन कमेटी की अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई,जिसके चलते सरकारी जमीन भी पूरी तरह से नहीं मिल सकी है।
वहीं,दूसरी तरफ सरकारी एजेंसियां ही एलएमआरसी को धन देने के लिए राजी नहीं हैं। साथ ही केंद्रीय एनओसी का इंतजार भी लंबा होता जा रहा है।
मजे की बात ये है कि मंडलायुक्त महेश गुप्ता जैसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को मेट्रो परियोजना के प्रति गंभीरता बरतने का सख्त आदेश मुख्य सचिव आलोक रंजन को देना पड़ रहा है।
मेट्रो स्टेशन्स तथा अन्य उपयोगों के लिए निजी स्वामित्व की भूमि को समझौते के आधार पर क्रय करने में आ रही कठिनाइयों के निवारण के लिए आयुक्त,लखनऊ मंडल की अध्यक्षता में गठित समिति तत्काल बैठक कर भूमि को एलएमआरसी को उपलब्ध कराने की जरूरत है।
विभिन्न राजकीय एवं अर्द्ध राजकीय विभागों द्वारा आवश्यक भूमि प्राथमिकता के आधार पर लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को उपलब्ध कराए जाने के लिए विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों पर तत्काल कार्यवाही करने के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी एजेंसियों ने नहीं दिए 190 करोड़
राज्य सरकार से एलएमआरसी को 100 करोड़ रुपये करीब 10 दिन पहले मिल चुके हैं। मगर आवास विकास परिषद को 120 करोड़, एलडीए को 40 करोड़ और यूपीएसआईडीसी से 30 करोड़ रुपये मिलने हैं।
ये 190 करोड़ रुपये देने में सरकारी एजेंसियां ही आनाकानी कर रही हैं जबकि मुख्य सचिव आलोक रंजन की ओर से सभी एजेंसियों को स्पष्ट आदेशित किया गया है कि वे जल्द से जल्द एलएमआरसी को बकाया धन उपलब्ध करवा दें।
आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ विकास प्राधिकरण तथा औद्योगिक विकास निगम को निर्देश दिए हैं कि वह मेट्रो के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2014-15 की अवशेष व वित्तीय वर्ष 2015-16 हेतु निर्धारित अंशदान तत्काल लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को उपलब्ध कराएं। मगर इस आदेश पर हाल फिलहाल अमल होता नहीं नजर आ रहा है।
रेलवे से मवइया को लेकर एनओसी नहीं
केंद्र सरकार से पीआईबी को लेकर छह अगस्त को बहुत संभव है कि लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना को हरी झंडी मिल जाएगी,मगर रेलवे की मवइया क्रॉसिंग के ऊपर स्पेशल स्पैन निर्माण को लेकर अब तक एनओसी नहीं मिल सकी है।
इस वजह से परेशानियों का हल होते नहीं दिख रहा है। यहां 105 मीटर लंबा एक विशेष पुल बनना है,जिसमें कुछ भूमि भी रेलवे को एलएमआरसी को देनी है।
मुख्य सचिव आलोक रंजन कहते हैं कि मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति में शिथिलता करने वाला कोई भी अधिकारी बख्शा नहीं जाएगा। हर हाल में सितंबर 2016 तक सभी काम पूरे कर लिए जाएं।
यहां पर कार्य में लापरवाही अक्षम्य होगी। निजी भूमि को समझौते के आधार पर खरीदने के लिए बनाई गई कमेटी की पहली मीटिंग जल्द करवाई जाए। साथ ही जिन एजेंसियों को फंड देना है,वह चालू वित्तीय वर्ष का अंशदान तत्काल करेंगे।