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Lucknow News: लघु उद्योग कैसे शुरू करें...लविवि में होगी पढ़ाई
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लखनऊ विश्वविद्यालय।
लखनऊ। स्नातक व परास्नातक के विद्यार्थी अपना लघु उद्योग कैसे शुरू करें? किस तरह रोजगार को बढ़ावा दें? इस संबंध में अब लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए आज की जरूरत के अनुसार कोर्स तैयार किए जाएंगे। लविवि जल्द ही इस दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बाजार में जिन लघु उद्योगों की शुरुआत होनी चाहिए और अच्छे मुनाफे के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है उनमें सब्जी मसाले, वाशिंग पाउडर, अगरबत्ती-धूपबत्ती सहित अन्य जरूरतमंद वस्तुओं के निर्माण से जुड़े उद्योग शमिल हैं। ऐसे उद्योग की शुरुआत कैसे की जा सकती है? सरकार या बैंक से कैसे मदद मिलेगी? कैसे और कहां रजिस्ट्रेशन कराना होगा? कितने बजट से शुरुआत हो सकती है? इस तरह के तमाम बिंदुओं के बारे में विद्यार्थियों को कोर्स में बताया और सिखाया जाएगा। ये कोर्स एक वर्ष की अवधि के होंगे। जल्द ही आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस विषय पर शिक्षकों के साथ चर्चा करके प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विद्यार्थियों के स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय की योजना है कि कोर्स में शामिल किसी विद्यार्थी के पास यदि कोई स्टार्टअप का आइडिया है तो वह उसे भी बता सकेगा। उस आइडिया पर मंथन कर स्टार्टअप को बढ़ावा देने के उपाय भी किए जाएंगे। इससे दूसरे विद्यार्थी भी लाभान्वित होंगे।
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विशेषज्ञ किए जाएंगे आमंत्रित
विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए अलग-अलग उद्योगों से जुड़े विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इनसे विद्यार्थी अपने सवालों के जवाब पा सकेंगे। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों के सुझाव भी लिए जाएंगे।
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मौजूदा समय में विश्वविद्यालय के कैंपस प्लेसमेंट सेल के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार मिल रहा है। अब विद्यार्थी अपने छोटे-छोटे लघु उद्योग शुरू कर सकें, इसके लिए भी उन्हें तैयार करने का लक्ष्य है।
-प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय
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विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बाजार में जिन लघु उद्योगों की शुरुआत होनी चाहिए और अच्छे मुनाफे के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है उनमें सब्जी मसाले, वाशिंग पाउडर, अगरबत्ती-धूपबत्ती सहित अन्य जरूरतमंद वस्तुओं के निर्माण से जुड़े उद्योग शमिल हैं। ऐसे उद्योग की शुरुआत कैसे की जा सकती है? सरकार या बैंक से कैसे मदद मिलेगी? कैसे और कहां रजिस्ट्रेशन कराना होगा? कितने बजट से शुरुआत हो सकती है? इस तरह के तमाम बिंदुओं के बारे में विद्यार्थियों को कोर्स में बताया और सिखाया जाएगा। ये कोर्स एक वर्ष की अवधि के होंगे। जल्द ही आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस विषय पर शिक्षकों के साथ चर्चा करके प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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विद्यार्थियों के स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय की योजना है कि कोर्स में शामिल किसी विद्यार्थी के पास यदि कोई स्टार्टअप का आइडिया है तो वह उसे भी बता सकेगा। उस आइडिया पर मंथन कर स्टार्टअप को बढ़ावा देने के उपाय भी किए जाएंगे। इससे दूसरे विद्यार्थी भी लाभान्वित होंगे।
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विशेषज्ञ किए जाएंगे आमंत्रित
विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए अलग-अलग उद्योगों से जुड़े विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इनसे विद्यार्थी अपने सवालों के जवाब पा सकेंगे। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों के सुझाव भी लिए जाएंगे।
मौजूदा समय में विश्वविद्यालय के कैंपस प्लेसमेंट सेल के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार मिल रहा है। अब विद्यार्थी अपने छोटे-छोटे लघु उद्योग शुरू कर सकें, इसके लिए भी उन्हें तैयार करने का लक्ष्य है।
-प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय