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Lucknow News: निलंबित छात्रों का छात्रावास आवंटन भी निरस्त
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के एपीसेन सभागार में गत सप्ताह आयोजित युवा संसद के दौरान छात्राओं से अभद्रता, छेड़खानी के मामले में निलंबित पांचों छात्र लविवि के हैं और यहां छात्रावास में रहते हैं। निलंबन के साथ ही हॉस्टल में इनका आवंटन भी निरस्त करते हुए विश्वविद्यालय की सभी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया है। निलंबित छात्रों को विश्वविद्यालय के उभय परिसर में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
कुलानुशासक कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी आदेश के अनुसार नौ सितंबर को मुख्य परिसर स्थित एपी सेन सभागार में छात्रोचित मर्यादाओं के प्रतिकूल आचरण का मामला सामने आया था। इस संबंध में चेयरपर्सन, आंतरिक शिकायत समिति की अंतरिम रिपोर्ट की संस्तुति के आधार पर कार्रवाई की गई है। इसकी जद में बीए (एनईपी) तृतीय वर्ष के दिव्यांश अवस्थी, अनुराग कुमार यादव (अनुराग चौधरी), नितिन पांडेय और अखिलेश प्रताप यादव तथा पीएचडी (राजनीतिशास्त्र) के शरद मिश्रा आए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन्हें आदेश मिलने के तीन कार्य दिवस के भीतर कुलानुशासक कार्यालय में उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने पर यह माना जाएगा कि छात्रों को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद उनके खिलाफ अग्रिम अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
एक नजर में मामला
युवराष्ट्र नामक संगठन ने यूथ पार्लियामेंट का आयोजन किया था। पुरस्कार वितरण के समय एक पक्ष ने घोषित परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाया, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान कुछ छात्राओं ने कपड़े फाड़ने, गलत नीयत से छूने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया था। इसके बाद पीड़ित छात्राओं ने रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर कार्रवाई के लिए लिखित रूप से शिकायत की थी। प्रॉक्टर को मामले की जांच सौंपी गई थी। इस मामले में आरोपी छात्रों को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। साथ ही यह मामला विवि की आंतरिक शिकायत समिति को सौंप दिया गया था।
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मूकदर्शक बने रहे शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं
प्रॉक्टर कार्यालय में मंगलवार को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने बयान के लिए एक ही पक्ष के छात्र-छात्राओं को बुलाया था। छह घंटे तक चली कवायद में शिकायतकर्ताओें ने पांच सदस्यीय आईसीसी को यह भी बताया कि उन्होंने अभद्रता की शिकायत वहां मौजूद शिक्षकों से भी की पर उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इस पर पुलिस से शिकायत की। छात्र-छात्राओं ने साक्ष्य के रूप में फोटो, वीडियो और ऑडियो भी प्रस्तुत किए। अब सवाल उठता है कि शिक्षकों ने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया। उन्होंने इसकी जानकारी भी लविवि प्रशासन को तुरंत नहीं दी। क्या उनसे भी इस बारे में पूछताछ नहीं की जानी चाहिए थी।
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कुलानुशासक कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी आदेश के अनुसार नौ सितंबर को मुख्य परिसर स्थित एपी सेन सभागार में छात्रोचित मर्यादाओं के प्रतिकूल आचरण का मामला सामने आया था। इस संबंध में चेयरपर्सन, आंतरिक शिकायत समिति की अंतरिम रिपोर्ट की संस्तुति के आधार पर कार्रवाई की गई है। इसकी जद में बीए (एनईपी) तृतीय वर्ष के दिव्यांश अवस्थी, अनुराग कुमार यादव (अनुराग चौधरी), नितिन पांडेय और अखिलेश प्रताप यादव तथा पीएचडी (राजनीतिशास्त्र) के शरद मिश्रा आए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन्हें आदेश मिलने के तीन कार्य दिवस के भीतर कुलानुशासक कार्यालय में उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने पर यह माना जाएगा कि छात्रों को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद उनके खिलाफ अग्रिम अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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एक नजर में मामला
युवराष्ट्र नामक संगठन ने यूथ पार्लियामेंट का आयोजन किया था। पुरस्कार वितरण के समय एक पक्ष ने घोषित परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाया, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान कुछ छात्राओं ने कपड़े फाड़ने, गलत नीयत से छूने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया था। इसके बाद पीड़ित छात्राओं ने रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर कार्रवाई के लिए लिखित रूप से शिकायत की थी। प्रॉक्टर को मामले की जांच सौंपी गई थी। इस मामले में आरोपी छात्रों को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। साथ ही यह मामला विवि की आंतरिक शिकायत समिति को सौंप दिया गया था।
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मूकदर्शक बने रहे शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं
प्रॉक्टर कार्यालय में मंगलवार को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने बयान के लिए एक ही पक्ष के छात्र-छात्राओं को बुलाया था। छह घंटे तक चली कवायद में शिकायतकर्ताओें ने पांच सदस्यीय आईसीसी को यह भी बताया कि उन्होंने अभद्रता की शिकायत वहां मौजूद शिक्षकों से भी की पर उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इस पर पुलिस से शिकायत की। छात्र-छात्राओं ने साक्ष्य के रूप में फोटो, वीडियो और ऑडियो भी प्रस्तुत किए। अब सवाल उठता है कि शिक्षकों ने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया। उन्होंने इसकी जानकारी भी लविवि प्रशासन को तुरंत नहीं दी। क्या उनसे भी इस बारे में पूछताछ नहीं की जानी चाहिए थी।