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आयुष्मान योजना : भुगतान की अड़ंगेबाजी से भी मुंह मोड़ रहे अस्पताल, निकाल रहे कमियां
Sat, 21 Sep 2019 05:55 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 21 Sep 2019 05:55 PM IST
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ayushman yojna
- फोटो : amar ujala
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आयुष्मान योजना में मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों को भुगतान मिलने में लंबा वक्त लग रहा है। कुछ न कुछ कमियां निकाल कर फाइलें लौटा दी जाती हैं। ऐसे में अस्पताल संचालकों को भुगतान कराने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी लगाने पड़ रहे हैं। इस वजह से भी वे मरीजों का इलाज करने से मुंह मोड़ रहे हैं।
राजधानी में 30 सरकारी और 129 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में पंजीकृत हैं। निजी अस्पतालों ने अभी तक 7172 मरीजों का इलाज किया है। अब तक 5888 मरीजों के भुगतान के लिए पत्रावलियां तैयार करके भेजे हैं। इसमें 923 फाइलें विभिन्न कारणों से निरस्त कर दी गईं।
वहीं गंभीर कमियां निकाल कर 3 फाइलें निरस्त कर दी गईं। सरकारी और निजी अस्पतालों को मिलाकर 10,305 बिल भेजे गए हैं, जिसमें साचीज (
स्टेट एजेंसी फॉर काम्प्रीहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज) की ओर से अभी तक सिर्फ 6346 बिल का भुगतान किया गया है।
अस्पताल संचालकों का कहना है कि भुगतान संबंधी खामियों की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। भुगतान की व्यवस्था मुकम्मल कर दी जाए तो निजी अस्पताल ज्यादा से ज्यादा मरीजों का इलाज करने के लिए तैयार हैं।
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राजधानी में 30 सरकारी और 129 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में पंजीकृत हैं। निजी अस्पतालों ने अभी तक 7172 मरीजों का इलाज किया है। अब तक 5888 मरीजों के भुगतान के लिए पत्रावलियां तैयार करके भेजे हैं। इसमें 923 फाइलें विभिन्न कारणों से निरस्त कर दी गईं।
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वहीं गंभीर कमियां निकाल कर 3 फाइलें निरस्त कर दी गईं। सरकारी और निजी अस्पतालों को मिलाकर 10,305 बिल भेजे गए हैं, जिसमें साचीज (
स्टेट एजेंसी फॉर काम्प्रीहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज) की ओर से अभी तक सिर्फ 6346 बिल का भुगतान किया गया है।
अस्पताल संचालकों का कहना है कि भुगतान संबंधी खामियों की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। भुगतान की व्यवस्था मुकम्मल कर दी जाए तो निजी अस्पताल ज्यादा से ज्यादा मरीजों का इलाज करने के लिए तैयार हैं।
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फाइलों में कोई न कोई कमी छोड़ देते हैं अस्पताल
सरकारी एवं निजी अस्पताल बिल की फाइलों में कोई न कोई कमी छोड़ देते हैं। इस वजह से भुगतान में दिक्कतें होती हैं। साचीज को भी कहा गया है कि भुगतान की व्यवस्था चुस्त एवं दुरुस्त बनाएं। बिल के संबंध में एक फॉर्मेट तैयार कराया गया है। इससे अब भुगतान में विलंब नहीं होगा।
- डा. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
जानें कैसे बनेगा गोल्डन कार्ड
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जनगणना 2011 के अनुसार जिन लोगों के नाम सूची में हैं, उनका गोल्डन कार्ड बन रहा है। सूची देखने के लिए अपने गांव अथवा मोहल्ले की आशा और एएनएम से संपर्क करें। फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर कार्ड बनवा लें। शासन की ओर से भेजी गई सूची में जिनकेनाम नहीं हैं, उनका कार्ड अभी नहीं बन सकता है। आयुष्मान की सूची में नाम जुड़वाने के लिए कोई रुपये मांगे तो सावधान हो जाएं। भविष्य में सरकार की ओर से नाम जोड़ने संबंधी आदेश मिलेगा तो सभी को अवगत कराया जाएगा।
- डा. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
जानें कैसे बनेगा गोल्डन कार्ड
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जनगणना 2011 के अनुसार जिन लोगों के नाम सूची में हैं, उनका गोल्डन कार्ड बन रहा है। सूची देखने के लिए अपने गांव अथवा मोहल्ले की आशा और एएनएम से संपर्क करें। फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर कार्ड बनवा लें। शासन की ओर से भेजी गई सूची में जिनकेनाम नहीं हैं, उनका कार्ड अभी नहीं बन सकता है। आयुष्मान की सूची में नाम जुड़वाने के लिए कोई रुपये मांगे तो सावधान हो जाएं। भविष्य में सरकार की ओर से नाम जोड़ने संबंधी आदेश मिलेगा तो सभी को अवगत कराया जाएगा।
कितनी सुधरी सेहत
केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का संचालन किया जा रहा है। इसकेतहत चयनित परिवार के सदस्यों का पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (बीपीएल) को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है।
लाभार्थियों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी लिए ‘अमर उजाला’ ने नए अभियान की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उसके निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई प्रतिक्रिया अथवा सुझाव हो तो इस नंबर पर संपर्क करें। व्हाट्सएप नंबर- 8859108092
लाभार्थियों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी लिए ‘अमर उजाला’ ने नए अभियान की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उसके निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई प्रतिक्रिया अथवा सुझाव हो तो इस नंबर पर संपर्क करें। व्हाट्सएप नंबर- 8859108092