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हिजबुल आतंकी कमरुज्जमा को कानपुर लाई एटीएस, जल्द ही भाई शफीकुल से हो सकता है आमना-सामना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 19 Sep 2018 11:47 AM IST
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हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी कमरुज्जमा
- फोटो : अमर उजाला
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गणेश चतुर्थी पर कानपुर को दहलाने के मंसूबे को अंजाम देने से पहले जांच एजेंसी के हत्थे चढ़े हिजबुल आतंकी कमरुज्जमा को लेकर एटीएस की एक टीम कानपुर पहुंची। यहां एटीएस के डीएसपी अनुराग सिंह उसे सिद्धि विनायक मंदिर और चकेरी के साथ उन स्थानों पर ले गए जहां वह पहले जा चुका था। दूसरी तरफ एटीएस असम में हिजबुल के आतंकी कमरुज्जमा के सेफ हाउस का पता लगाने में जुटी है।
एटीएस के अनुसार, कमरुज्जमा को रेकी वाले स्थानों के अलावा उन जगहों पर ले जाया गया, जहां वह रुका था और लोगों से मिला था। इस दौरान उसने अधिकारियों को कई अहम जानकारियां भी दीं, जिनकी सच्चाई परखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो कमरुज्जमा ने यूपी के अपने दोनों साथियों के बारे में बताया है। यह साथी सतर्क होकर भाग न जाएं इस लिए इसे गोपनीय रखा जा रहा है।
एटीएस के अनुसार, कमरुज्जमा ने बताया कि वह अपने परिवार के लोगों से भी नहीं मिला। वह सिर्फ दो दोस्तों से मिला, जिनमें से एक ने उसे असम में रहने के लिए किराए पर जगह दिलाई थी। एटीएस ने यह भी जानना चाहा कि कानपुर आने से पहले वह 12 दिनों तक असम में क्या कर रहा था, पर उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अंदेशा है कि कमरुज्जमा असम में किसी सेफ हाउस में हिजबुल मुजाहिदीन के संपर्क में था। उसने असम के कुछ युवकों की हिजबुल कमांडरों से वहीं पर मुलाकात कराई।
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एटीएस के अनुसार, कमरुज्जमा को रेकी वाले स्थानों के अलावा उन जगहों पर ले जाया गया, जहां वह रुका था और लोगों से मिला था। इस दौरान उसने अधिकारियों को कई अहम जानकारियां भी दीं, जिनकी सच्चाई परखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो कमरुज्जमा ने यूपी के अपने दोनों साथियों के बारे में बताया है। यह साथी सतर्क होकर भाग न जाएं इस लिए इसे गोपनीय रखा जा रहा है।
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एटीएस के अनुसार, कमरुज्जमा ने बताया कि वह अपने परिवार के लोगों से भी नहीं मिला। वह सिर्फ दो दोस्तों से मिला, जिनमें से एक ने उसे असम में रहने के लिए किराए पर जगह दिलाई थी। एटीएस ने यह भी जानना चाहा कि कानपुर आने से पहले वह 12 दिनों तक असम में क्या कर रहा था, पर उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अंदेशा है कि कमरुज्जमा असम में किसी सेफ हाउस में हिजबुल मुजाहिदीन के संपर्क में था। उसने असम के कुछ युवकों की हिजबुल कमांडरों से वहीं पर मुलाकात कराई।
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इन तथ्यों की जांच में जुटी एटीएस
अधिकारियों के मुताबिक कमरुज्जमा के छिपने की जानकारी उसके भाई शफीकुल को थी। हालांकि दस दिन के रिमांड पर आए शफीकुल से पूछताछ चल रही है। इसके बाद दोनों भाइयों का आमना-सामना हो सकता है। एटीएस इसका पता लगा रही है कि कमरुज्जमा आतंकी संगठन के कितने लोगों को जानता है, कितने युवकों को हिजबुल के आकाओं से मिलवाया और कितने युवकों को आतंकी प्रशिक्षण के लिए भेजा है। असम के अलावा और कहां-कहां उसके सेफ हाउस हैं।