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हिजाब प्रकरण : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित उलमा ने जस्टिस धूलिया के फैसले को सराहा

Thu, 13 Oct 2022 08:16 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 13 Oct 2022 08:16 PM IST
सार

मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने स्कूलों में लड़कियों के हिजाब के इस्तेमाल के संबन्ध में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच के फैसले पर कहा कि जस्टिस धूलिया ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और उनकी शिक्षा में बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केन्द्रित किया है। उनके इस पहलू का स्वागत है।

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Hijab Case: Ulama including Muslim Personal Law Board praised Justice Dhulia's decision
Hijab, muslim girl, burka, हिजाब, बुर्का - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हिजाब मामले में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस धूलिया के फैसले की सराहना की है। बोर्ड ने उनकी टिप्पणी को भारत के संविधान और व्यक्तिगत आजादी के अनुरूप बताया। बोर्ड ने कर्नाटक सरकार से हिजाब मामले में अपना आदेश वापस लेने की मांग की। 

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने स्कूलों में लड़कियों के हिजाब के इस्तेमाल के संबन्ध में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच के फैसले पर कहा कि जस्टिस धूलिया ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और उनकी शिक्षा में बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केन्द्रित किया है। उनके इस पहलू का स्वागत है। उन्होंने कहा कि जस्टिस हेमंत गुप्ता के फैसले से ये पहले गायब हे। 
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मौलाना ने कहा कि कर्नाटक सरकार सवालों के घेरे में है। अगर वो अपना आदेश वापस ले लेती है तो पूरा विवाद अपने आप खत्म हो जाएगा। मौलाना ने कहा कि सरकार को लड़कियों की शिक्षा में बाधा उत्पन्न करने वाले किसी भी मामले का समर्थन नही करना चाहिये। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की बटी हुई राय की वजह से मामला अब बड़ी बेंच को भेजा जाएगा। 
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इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन एवं ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि हिजाब इस्लामी शरीयत का आदेश है। ये मुस्लिम महिलाओं के लिये नमाज, रोजा, जकात और अन्य इस्लामी आदेश की तरह जरूरी है। मौलाना ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया की तारीफ करते हुये कहा कि उन्होंने हिजाब के फैसले में कहा कि शिक्षा का अधिकार एक अहम और बड़ी समस्या है। धर्म की आजादी और निजी चुनाव का अधिकार सबको प्राप्त है। मौलाना ने कहा कि हिजाब मामला सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को देना अच्छा है। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुये कहा कि अंतिम फैसले में इस हकीकत को जरूर दृष्टिगत रखा जाएगा कि हिजाब इस्लामी शरियत का अनिवार्य हिस्सा है। 


शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव यासूब अब्बास ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पर रोक लगाना कानूनी अधिकारी नही है। इस्लाम धर्म में मुस्लिम महिलाओं को इज्जत की निगाह से देखा गया है, इसलिये पर्दे का हुक्म दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट का हिजाब के मसले पर फैसला हमारी धार्मिक भावनाओं और पर्सनल लॉ को देखते हुए होगा।

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