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आरोपी वकील है तो भी उसे कोई विशेष स्थान नहीं : हाईकोर्ट

Sat, 20 Nov 2021 01:42 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Nov 2021 01:42 AM IST
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Highcourt said that even if the accused is a lawyer, he has no special place
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दिया अहम फैसला। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि कथित अपराध में आरोपी का वकील होना उसे किसी ऊंचे स्थान पर नहीं रखता है।
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कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ मारपीट के मामले में निष्पक्ष व बिना किसी दबाव के विवेचना करने का आदेश पुलिस को दिया है। साथ ही सेंट्रल बार एसोसिएशन से युवा वकीलों को प्रशिक्षित करने व मार्गदर्शन देने की अपेक्षा की है।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने यह फैसला एक स्थानीय वकील अवनीश शुक्ला की याचिका पर दिया।
इसमें नगराम थाने में दर्ज कराए गए मारपीट व अपशब्द कहने आदि के आरोपों वाले मुकदमे में निष्पक्ष व साफ सुथरी विवेचना के निर्देश पुलिस को देने की गुजारिश की गई थी।
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याची का कहना था कि उसके दिए दस्तावेजों पर विवेचक गौर नहीं कर रहे हैं। उधर, वादी मुकदमा के अधिवक्ता ने कहा कि याची एक अधिवक्ता है, जिसने अपने बचाव में जो दस्तावेज पुलिस को दिए हैं उनमें से कई सेंट्रल बार के पदाधिकारियों के जरिए दिए गए।
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इससे पता चलता है कि केस की तफ्तीश को प्रभावित करने की कोशिश की गई। जबकि सरकारी वकील ने कोर्ट के समक्ष सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के पत्र के साथ पुलिस कमिश्नर लखनऊ को संबोधित दस्तावेज भी पेश किए।
इस पर कोर्ट ने कहा कि जब विवेचना प्रगति पर हो तब आरोपी की तरफ से उठाए गए इस कदम की सराहना नहीं की जा सकती, बल्कि यह निंदा करने लायक है।
कोर्ट ने कहा कि किसी अपराध की तफ्तीश के दौरान अरोपी या फिर वादी की तरफ से प्रभावित करने वाली चीजें स्वीकार्य नहीं हैं।
समाज में कोई भी स्थिति रखने वाले अरोपी से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह किसी तरह से विवेचना को प्रभावित करने वाला दबाव डालेगा।
अदालत ने विवेचक को निर्देश दिया कि याची द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों पर बगैर किसी दबाव के गौर करें और किसी भी पक्षकार की तरफ से अपनाई जाने वाली किसी गैर न्यायिक तरकीब से कतई प्रभावित न हों।

युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित करे सेंट्रल बार एसोसिएशन
कोर्ट ने इस आदेश की कॉपी सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को भेजने के साथ अपेक्षा की है कि बार खुद आत्म चिंतन करेगी और न सिर्फ वकालत में आने वाली युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित व मार्गदर्शन देगी बल्कि उनके अभिभावक की भूमिका निभाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि नए वकील खुद को अधिक जिम्मेदार नागरिक के साथ व्यावसायिक अधिवक्ता के रूप में विकसित करें।
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