मिशन गंगा: अफसरों पर गिरी कोर्ट की गाज!
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बनारस के घाटों से अतिक्रमण नहीं हटाने पर गहरी नाराजगी जताई है। आदेश को हल्के में लेने के लिए अधिकारियों की आलोचना की तथा दो सप्ताह के भीतर डीएम और वीडीए उपाध्यक्ष को बैठक कर स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को कौटिल्य सोसाइटी की ओर से याची वृंदा डार और एमिकस क्यूरी मनीष गोयल के साथ स्थलीय निरीक्षण का रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया है।
कौटिल्य सोसाइटी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने दरभंगा पैलेस में हुए अवैध निर्माण पर भी डीएम से जवाब मांगा है।
महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि पूर्व में दिए गए आदेशों के पालन में घाटों के आसपास अवैध निर्माणों को चिह्नित करने का कार्य पूरा हो गया है। कुछ भवन गिराए गए हैं।
वकील भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके
याची वृंदा ने इसका प्रतिवाद करते हुए बताया कि कोई भी अवैध निर्माण गिराया नहीं गया है। कुछ भवनों को वीडीए ने पंक्चर किया है। इससे उनके मूल ढांचे पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए की जा रही है।
खंडपीठ ने जानना चाहा कि क्या घाटों के आसपास बने सभी होटल वैध रूप से बने हैं या कुछ निर्माण अवैध भी हैं। यदि ऐसा है तो कितने होटलों पर कार्रवाई की गई है। सरकार के वकील इसका संतोष जनक जवाब नहीं दे सके।
कोर्ट ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वह अधिकारियों के साथ बैठक करें और निरीक्षण की वीडियोग्राफी कराई जाए।
गंगा रीजुविनेशन मंत्रालय को भी इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। याचिका पर अगली सुनवाई आठ जनवरी को होगी।