{"_id":"6b10d632de340f3811fe5dff33138efa","slug":"high-price-for-water-in-lucknow","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली में मुफ्त पानी लखनऊ में कीमत बढ़ाएगी हैरानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली में मुफ्त पानी लखनऊ में कीमत बढ़ाएगी हैरानी
ऋषि मिश्र/अमर उजाला,लखनऊ
Updated Fri, 03 Jan 2014 01:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने प्रत्येक घर 666 लीटर पानी रोज मुफ्त देने का ऐलान किया हो लेकिन, उत्तर प्रदेश सरकार राजधानी के नागरिकों पर पानी के जरिए तीन से साढ़े सात गुना अधिक बोझ डालने की तैयारी कर रही है।
विज्ञापन
शासन ने राजधानी सहित प्रदेश के कई महानगरों में वाटर मीटर अनिवार्य करने का ऐलान कर दिया है। इसके लगने के बाद जितना अधिक पानी खर्च होगा उतना अधिक जलमूल्य चुकाना होगा।
विज्ञापन
इस संबंध में जल संस्थान ने जो प्रस्तावित टैरिफ बनाया है, उसके मुताबिक प्रतिदिन तीन हजार लीटर तक पानी का इस्तेमाल करने पर प्रत्येक एक हजार लीटर के लिए करीब 6 रुपये देने होंगे।
विज्ञापन
यही मूल्य 3000 से 5000 लीटर पानी के इस्तेमाल पर मूल्य आठ रुपये प्रति हजार लीटर तक पहुंच जाएगा। इसी तरह से पानी के उपयोग के बढ़ते हुए क्रम में पानी का मूल्य प्रति एक हजार लीटर के लिए 15 रुपये प्रति हजार लीटर तक पहुंच जाएगा।
अभी तक घरेलू वाटर सप्लाई में जलमूल्य नहीं लिया जाता है, सामान्यत: दो रुपये के हिसाब से प्रति हजार लीटर पर फिक्स वाटर टैक्स की वसूली होती है। ऐसे में पानी की फिजूल खर्ची करने वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ता है, मगर अब ऐसा नहीं होगा।
यानी की प्रत्येक वर्ग के लिए जलमूल्य आने वाले समय में तीन से लेकर साढ़े सात गुना तक बढ़ जाएगा। अनावासीय क्षेत्र के लिए भी प्रस्तावित जलमूल्य वर्तमान मूल्य से तीन गुना होगा।
वाटर मीटर लगाने का काम अगले महीने से शुरू हो जाएगा। इस संबंध में शासन की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। जल निगम, नगर निगम और जल संस्थान इस दिशा में काम करेंगे। ऐसे में आम आदमी पानी के लिए पैसे चुकाने का बोझ बढ़ना तय है।
अभी दो रुपये प्रति किलोलीटर का खर्च
अभी जहां प्रति हजार लीटर के लिए लोग दो रुपये खर्च कर रहे थे वहीं भविष्य में इतने ही पानी के लिए उन्हें छह रुपये खर्च करना होगा।
जबकि अगर पानी का खर्च बढ़ता है तो यह 15 रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में स्पष्ट है कि आम आदमी के लिए पानी पर खर्च लगभग तीन से साढ़े सात गुना तक बढ़ेगा।
अनावासीय वर्गों के लिए जलमूल्य
अनावासीय क्षेत्र में भी जलमूल्य जो कि पहले से ही मीटर के जरिए लिया जाता था, आने वाले समय में इसमें खासी बढ़ोत्तरी होगी।
हर वर्ग में यह तीन गुना तक हो सकती है। जिसके लिए भी जल संस्थान ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
औद्योगिक श्रेणी के लिए पहले जहां 10 रुपये प्रति किलो लीटर की दर से जलमूल्य लिया जाता था, वहीं अब 30 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से जलमूल्य वसूला जाएगा।
वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पहले छह रुपये प्रति हजार लीटर की दर से वसूली होती थी, जो कि अब 18 रुपये प्रति हजार लीटर की दर से वसूली होगी।
सरकारी, शैक्षणिक संस्थान से अब 12 रुपये प्रति एक हजार लीटर की दर से लिया जाएगा।
ट्रांसगोमती में सबसे अधिक खर्च
शहर को अगर तीन हिस्सों में बांट दें, तो कम आबादी के बावजूद पानी पर होने वाले खर्च का सबसे अधिक बोझ ट्रांसगोमती के लोगों पर पड़ेगा।
मकानों में व्यवसायिक गतिविधियों के संचालन और अधिक आय वर्ग के लोगों के होने की वजह से यहां पानी की खपत बहुत अधिक है।
यहां बाकायदा पूरे एक जलकल के जरिए अलग से करीब 150 एमएलडीए की आपूर्ति की जाती है। जबकि, पुराने शहर के विभिन्न इलाकों में सबसे कम खपत का अनुमान है।
यहां पानी की आपूर्ति अक्सर बाधित रहने, मकानों में कम व्यवसायिक गतिविधियों और कुछ अन्य कारणों से सबसे कम खर्च होगा।
कानपुर रोड की नई कॉलोनियों और रायबरेली रोड जैसी जगहों पर औसत पानी खर्च होता है। शहर में रोजाना की आपूर्ति करीब पांच सौ एमएलडीए है।