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Lucknow News: पार्षद को 29 मई तक शपथ न दिलाने पर हाईकोर्ट ने महापौर को किया तलब, देना होगा जवाब

Fri, 22 May 2026 09:09 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Fri, 22 May 2026 09:09 PM IST
सार

लखनऊ में पार्षद को 29 मई तक शपथ न दिलाने पर हाईकोर्ट ने महापौर को तलब किया। कहा कि जवाब देना होगा कि आदेश की जानबूझकर अवज्ञा पर अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए? आगे पढ़ें पूरी खबर...

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High Court Summons Mayor for Failing to Administer Oath to Councilor in Lucknow by May 29
महापौर सुषमा खर्कवाल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

यूपी में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी लखनऊ के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से निर्वाचित सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को पांच महीने बाद भी पद एवं गोपनीयता की शपथ न दिलाए जाने पर सख्ती जारी रखी है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिए आदेश में कहा कि यदि 29 मई तक पार्षद को शपथ दिलाने के आदेश का पालन नहीं किया गया तो लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल को कोर्ट में पेश होकर अपना निजी हलफनामा दाखिल करना होगा। 

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इसमें उन्हें इसका कारण बताना होगा कि हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने के लिए उनके खिलाफ क्यों न अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। इसी आदेश में हाईकोर्ट ने मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि इस आदेश को तत्काल अनुपालन के लिए सरकार को भेजें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित करके अग्रिम आदेशों तक लखनऊ के डीएम को उपस्थिति से छूट प्रदान की है।

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पार्षद को शपथ नहीं दिलाई गई

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एस.क्यू.एच रिजवी की खंडपीठ ने यह आदेश ललित किशोर तिवारी की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। याचिकाकर्ता का कहना था कि निर्वाचन न्यायाधिकरण ने उन्हें 19 दिसंबर 2025 को निर्वाचित घोषित किया था, लेकिन अब तक उनको शपथ नहीं दिलाई गई है। इस बीच पूर्व निर्वाचित सदस्य अभी भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है।

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डीएम और नगर आयुक्त पेश हुए थे

हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर स्पष्ट कहा था कि यदि अगली सुनवाई की तिथि 21 मई तक शपथ नहीं दिलाई गई, तो लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त और मेयर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा। इसके तहत डीएम और नगर आयुक्त पेश हुए थे, लेकिन महापौर पेश नहीं हो सकीं। बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के समय पहले के आदेश के तहत निर्वाचित पार्षद को शपथ दिलाए जाने तक के लिए मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार निलंबित कर दिए थे।

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