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मुख्तार के दोनों बेटों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Thu, 22 Oct 2020 01:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2020 01:48 AM IST
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high court stopped the arresting of mukhtar ansari's sons
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विधायक मुख्तार अंसारी के दो बेटों के खिलाफ दर्ज फर्जीवाड़े के आरोपों की एफआईआर मामले में उनकी गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने को चार हफ्ते का समय दिया है। इसके बाद दो हफ्ते में याचियों की तरफ से जवाब दाखिल किया जा सकेगा। अदालत ने इस समय के तुरंत बाद याचिका को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। तब तक याचियों की इस केस में गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। हालांकि, कोर्ट ने साफ कहा कि इस केस की तफ्तीश जारी रहेगी और दोनों याची विवेचना करने वाली एजेंसी को पूरा सहयोग करेंगे।
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न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने यह आदेश बुधवार को मुख्तार अंसारी के दो बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिका में राजधानी की हजरतगंज कोतवाली में उनके खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को रद्द करने की गुजारिश करते हुए आरोपियों की इस प्रकरण में गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आग्रह किया गया था। इसमें शहर के डालीबाग इलाके में कथित निष्क्रान्त सम्पत्ति पर घर का नक्शा एलडीए से मंजूर कराने में फर्जीवाड़ा करने के आरोप हैं। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से मुख्तार के दोनों बेटों को इस केस में फिलहाल बड़ी राहत मिली है।
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याचियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ताओं हरिगोविंद सिंह परिहार व जयदीप नारायण माथुर ने दलील दी थी कि यह मामला दीवानी प्रकृति के विवाद का है और प्रश्नगत प्राथमिकी से याचियों के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। कहा गया कि याचियों को राजनीतिक विद्वेष से फंसाया गया है लिहाजा याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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उधर, राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि प्रश्नगत प्राथमिकी से पहली नजर में संज्ञेय मामला बनता है। महाधिवक्ता की यह भी दलील थी कि याचियों ने साफ- सुथरे तरीके से कोर्ट को अप्रोच नहीं किया है और गुमराह करने के लिए मामले के सारवान तथ्यों को छिपाया है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस मामले में याचियों को अंतरिम राहत देने का केस बनता है और फर्जीवाड़े के आरोपों की एफआईआर मामले में याचियों की गिरफ्तारी पर, मामले के आगे सूचीबद्ध होने तक रोक लगाई जाती है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद अंतरिम राहत की अर्जी पर गत 16 अक्तूबर को अपना आदेश सुरक्षित कर लिया था जिसे बुधवार को सुनाया।
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