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हाईकोर्ट ने जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन पर लगाई अंतरिम रोक, कहा- कोर्ट की इजाजत जरूरी
Fri, 05 Mar 2021 01:27 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 05 Mar 2021 01:27 AM IST
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लखनऊ हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोर्ट की इजाजत के बिना प्रदेश में जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 मार्च को नियत की गई है। मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश अवध बार एसोसिएशन की जनहित याचिका पर पारित किया।
याचिका में जीएसटी काउंसिल के 14 मार्च 2020 के प्रस्ताव को चुनौती दी गई है। इसके जरिये प्रयागराज में काउंसिल की पीठ स्थापित करने की बात कही गई है। केंद्र सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि केंद्र व जीएसटी काउंसिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 9 फरवरी 2021 के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का निर्णय किया है। इस आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तय समय में प्रयागराज में जीएसटी काउंसिल गठित करने को कहा था।
अवध बार की याचिका पर इसके अध्यक्ष व वरिष्ठ वकील एचजीएसस परिहार और अन्य अधिवक्ताओं जेएन माथुर व एलपी मिश्रा ने कहा कि पहले जीएसटी काउंसिल ने अपीलेट ट्रिब्यूनल लखनऊ में गठित करने का निर्णय किया था। पर बाद में अपना निर्णय बदल दिया, जो बिना किसी आधार के और सरासर गलत है। जबकि लखनऊ में ट्रिब्यूनल बनने से वादकारियों को काफी सुविधा होगी। यहां के अधिवक्ता इस मुद्दे 24 फरवरी से न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। वे शुक्रवार को भी न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
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गौरतलब है कि वर्ष 2018 में राज्य सरकार ने जीएसटी की स्टेट बेंच लखनऊ और एरिया बेंच की स्थापना प्रयागराज समेत 20 शहरों में करने का अनुमोदन किया था। बाद में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 31 मई 2019 को आदेश में कहा था कि ऐसा कोई न्यायिक निर्णय नहीं है कि प्रिंसिपल बेंच वाले शहर में ही जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाए। अवध बार की ओर से दलील दी गई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे के दबाव में पूर्व के प्रस्ताव को जीएसटी काउंसिल ने बदल दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने शिक्षा सेवा अधिकरण के गठन के बारे में भी ऐसा ही आदेश 3 मार्च को दिया था कि बिना उसकी अनुमति के ट्रिब्यूनल का गठन नहीं होगा।
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याचिका में जीएसटी काउंसिल के 14 मार्च 2020 के प्रस्ताव को चुनौती दी गई है। इसके जरिये प्रयागराज में काउंसिल की पीठ स्थापित करने की बात कही गई है। केंद्र सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि केंद्र व जीएसटी काउंसिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 9 फरवरी 2021 के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का निर्णय किया है। इस आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तय समय में प्रयागराज में जीएसटी काउंसिल गठित करने को कहा था।
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अवध बार की याचिका पर इसके अध्यक्ष व वरिष्ठ वकील एचजीएसस परिहार और अन्य अधिवक्ताओं जेएन माथुर व एलपी मिश्रा ने कहा कि पहले जीएसटी काउंसिल ने अपीलेट ट्रिब्यूनल लखनऊ में गठित करने का निर्णय किया था। पर बाद में अपना निर्णय बदल दिया, जो बिना किसी आधार के और सरासर गलत है। जबकि लखनऊ में ट्रिब्यूनल बनने से वादकारियों को काफी सुविधा होगी। यहां के अधिवक्ता इस मुद्दे 24 फरवरी से न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। वे शुक्रवार को भी न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
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गौरतलब है कि वर्ष 2018 में राज्य सरकार ने जीएसटी की स्टेट बेंच लखनऊ और एरिया बेंच की स्थापना प्रयागराज समेत 20 शहरों में करने का अनुमोदन किया था। बाद में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 31 मई 2019 को आदेश में कहा था कि ऐसा कोई न्यायिक निर्णय नहीं है कि प्रिंसिपल बेंच वाले शहर में ही जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाए। अवध बार की ओर से दलील दी गई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे के दबाव में पूर्व के प्रस्ताव को जीएसटी काउंसिल ने बदल दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने शिक्षा सेवा अधिकरण के गठन के बारे में भी ऐसा ही आदेश 3 मार्च को दिया था कि बिना उसकी अनुमति के ट्रिब्यूनल का गठन नहीं होगा।