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बिकरू कांड: एसआईटी रिपोर्ट पर कार्रवाई की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने याची पर ठोंका 25,000 हर्जाना
Mon, 21 Jun 2021 02:32 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 21 Jun 2021 02:32 PM IST
सार
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बिकरू कांड मामले पर दायर की गई एक याचिका को खारिज करते हुए 25 हजार रुपये जुर्माना ठोंका है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बिकरू कांड पर तैयार की गई एसआईटी की रिपोर्ट समेत जय वाजपेयी मामले में विधि सम्मत कार्रवाई के आग्रह वाली जनहित याचिका को सोमवार को शुरुआती सुनवाई के बाद खारिज कर दिया।
कोर्ट ने याचिका को जनहित याचिका मानने से इन्कार करते हुए कहा कि यह निज हित में दायर की गई है। इसके लिए याची पर 25 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया जाता है।
मुख्य न्यायमूर्ति संजय यादव और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने यह आदेश कानपुर के वकील सौरभ भदौरिया की याचिका पर दिया।
याची का कहना था कि जय वाजपेयी चर्चित बिकरु कांड में अभियुक्त है। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सचिवालय में फर्जी एंट्री पास बनवाए जाने, फर्जी पासपोर्ट बनवाए जाने तथा फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनाए जाने संबंधित मुकदमे भी दर्ज हैं। साथ ही उसके खिलाफ पहले से ही विभिन्न धाराओं में कई थानों में मुकदमे दर्ज थे। पूर्व में भी उसकी सहायता करने वाले तमाम पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कई जांच रिपोर्ट में कई संस्तुति की गईं थीं लेकिन इन पर आज तक सही कार्रवाई नहीं हुई है।
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याचिका में पहले की इन रिपोर्टों पर कार्रवाई करने की गुजारिश की गयी थी साथ ही बिकरू कांड की एसआईटी रिपोर्ट को मंगवाते हुए उसकी संस्तुतियों पर कार्रवाई करने का भी आग्रह किया गया था।
उधर, राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील क्यू एच रिजवी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका, जनहित याचिका के रूप में सुनवाई लायक नहीं है और खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने याचिका को पीआईएल मानने से इन्कार कर निज हित वाली करार देकर 25 हजार हर्जाने का आदेश दिया है।
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कोर्ट ने याचिका को जनहित याचिका मानने से इन्कार करते हुए कहा कि यह निज हित में दायर की गई है। इसके लिए याची पर 25 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया जाता है।
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मुख्य न्यायमूर्ति संजय यादव और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने यह आदेश कानपुर के वकील सौरभ भदौरिया की याचिका पर दिया।
याची का कहना था कि जय वाजपेयी चर्चित बिकरु कांड में अभियुक्त है। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सचिवालय में फर्जी एंट्री पास बनवाए जाने, फर्जी पासपोर्ट बनवाए जाने तथा फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनाए जाने संबंधित मुकदमे भी दर्ज हैं। साथ ही उसके खिलाफ पहले से ही विभिन्न धाराओं में कई थानों में मुकदमे दर्ज थे। पूर्व में भी उसकी सहायता करने वाले तमाम पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कई जांच रिपोर्ट में कई संस्तुति की गईं थीं लेकिन इन पर आज तक सही कार्रवाई नहीं हुई है।
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याचिका में पहले की इन रिपोर्टों पर कार्रवाई करने की गुजारिश की गयी थी साथ ही बिकरू कांड की एसआईटी रिपोर्ट को मंगवाते हुए उसकी संस्तुतियों पर कार्रवाई करने का भी आग्रह किया गया था।
उधर, राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील क्यू एच रिजवी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका, जनहित याचिका के रूप में सुनवाई लायक नहीं है और खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने याचिका को पीआईएल मानने से इन्कार कर निज हित वाली करार देकर 25 हजार हर्जाने का आदेश दिया है।