{"_id":"6a1e51d15c9460c16c0ebe10","slug":"high-court-has-held-that-criminal-case-cannot-be-quashed-merely-because-civil-dispute-is-pending-2026-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP News: 'दीवानी विवाद लंबित होने से आपराधिक मुकदमा खत्म नहीं हो सकता', पढ़ें हाईकोर्ट ने और क्या कहा?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP News: 'दीवानी विवाद लंबित होने से आपराधिक मुकदमा खत्म नहीं हो सकता', पढ़ें हाईकोर्ट ने और क्या कहा?
Tue, 02 Jun 2026 09:27 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Tue, 02 Jun 2026 09:27 AM IST
सार
दीवानी विवाद लंबित होने से आपराधिक मुकदमा खत्म नहीं हो सकता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दीवानी और आपराधिक कार्रवाई एक साथ चल सकती है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
हाईकोर्ट।
-
- 1
-
Link Copied
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि किसी मामले में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया अपराध का संकेत देते हैं तो केवल इस आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती कि पक्षकारों के बीच दीवानी विवाद भी लंबित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दीवानी और आपराधिक कार्रवाई एक साथ चल सकती हैं।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी आरोपमुक्ति अर्जी खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन बनाम एनईपीसी इंडिया लिमिटेड मामले का हवाला देते हुए कहा कि एक ही घटना से दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार के विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। केवल दीवानी उपचार उपलब्ध होने या उसके उपयोग से आपराधिक कार्यवाही समाप्त नहीं की जा सकती। मुख्य प्रश्न यह है कि शिकायत में आपराधिक अपराध के आवश्यक तत्व मौजूद हैं या नहीं।
विज्ञापन
मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उसके मकान पर जबरन कब्जा कर लिया और सामान निकालकर ले गए। इस संबंध में दीवानी मुकदमा दायर होने पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी पारित हुआ था। पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने पर अदालत के आदेश से मुकदमा दर्ज हुआ। जांच के बाद नौ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए गए।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने पाया कि पांचवें, छठे, आठवें और नौवें आरोपियों के नाम बाद में जोड़े गए हैं, इसलिए उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया। वहीं पहले से चौथे तथा सातवें आरोपी के खिलाफ कब्जा और चोरी के विशिष्ट आरोप पाए जाने पर उनके विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया गया।