दो दिन में कंट्रोल में करें स्वाइन फ्लू : कोर्ट
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प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते हुए मामलों में हाइकोर्ट ने दखल दिया है। स्वाइन फ्लू को लेकर कोर्ट में दायर की गई एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार को स्वाइन फ्लू से जुड़े सख्त निर्देश दिए हैं।
जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा और जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह किसी भी सूरत में स्वाइन फ्लू पर नियंत्रण पाने वाली दवा टेमी फ्लू की कम से कम 3 लाख दवाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि स्वाइन फ्लू का संक्रमण रोकने के लिए जिस स्तर के मॉस्क की जरूरत है उस तरह के मॉक्स सरकारी अस्पतालों में होने चाहिए।
कोर्ट ने यह निर्देश उप्र के चीफ सेकेट्री और पीएस स्वास्थ्य को दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि दो से तीन दिनों के अंदर दवाएं और मॉस्क उपलब्ध ही होने चाहिए।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्वाइन फ्लू से लोगों की हिफाजत को लेकर सूबे के डीजी मेडिकल हेल्थ समेत लखनऊ के डीएम, सीएमओ और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को बुधवार को तलब किया था।
पीआईएल पर आया फैसला
कोर्ट का यह फैसला अधिवक्ता त्रिपुरेश त्रिपाठी की एक जनहित याजिका पर आया है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में पेश हुई अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल को भी राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त कर पक्ष व जवाब पेश करने को कहा था। साथ ही कोर्ट ने पूछा था कि स्वाइन फ्लू जैसी की बीमारियों की रोकथाम के लिए क्या किए जा रहे हैं और क्या कार्रवाई प्रस्तावित है?
याची की अधिवक्ता नूतन ठाकुर ने कोर्ट में दलील दी थी कि स्वाइन फ्लू को प्रभावी तरीके से रोकने में केंद्र व राज्य सरकार नाकाम हो रही हैं। जरूरी दवाओं व जांच के लिए लैब की कमी के चलते लोग इसकी चपेट में आते जा रहे हैं। इसके बावजूद सरकारी व निजी अस्पताल गैरजिम्मेदाराना रवैया अपना रहे हैं।
याची ने केंद्र व राज्य सरकार को स्वाइन फ्लू के नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए जाने की गुजारिश की। वही, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने बताया कि सरकार खुद इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण व इनसे लोगों की हिफाजत को लेकर गंभीर है। इसके लिए मुकम्मल इंतजाम किए गए हैं और कई किए जाने हैं।