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Lucknow News: केजीएमयू में लेजर की सहायता से खोल दिए दिल के ब्लॉक
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डॉ. अक्षय प्रधान।
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में अब लेजर की सहायता से दिल की धमनियों के ब्लॉक खोले जा रहे हैं। इसके लिए विभाग में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से नई मशीन लगाई गई है। इस मशीन से पांच मरीजों के ब्लॉक खोले जा चुके हैं। इसके लिए फिलहाल कोई शुल्क भी नहीं लिया जा रहा है।
केजीएमयू में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रवक्ता डॉ. अक्षय प्रधान ने बताया कि यह मशीन उन मरीजों के दिल के जटिल ब्लॉक खोलने में सहायक होगी, जिन्हें पारंपरिक उपचार विधियों से लाभ नहीं मिला है। मुख्य रूप से इस मशीन के माध्यम से जटिल ब्लॉक को खोलने, कैल्शियम जमा होने या फिर पहले से पड़े स्टेंट में ब्लॉकेज खोले जा सकते हैं। लेजर जमे हुए कैल्शियम को नरम कर देता है। इसके बाद उन्हें गुब्बारे के माध्यम से हटा दिया जाता है।
लेजर उन मरीजों के मामले में भी उपयोगी है, जिनमें पहले से ही स्टेंट पड़ा होने से दूसरा स्टेंट नहीं डाला जा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित है। केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि यह मशीन राज्य सरकार से मिले अनुदान से खरीदी गई है। इसलिए फिलहाल इसका कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। एक वर्ष के बाद मेंटेनेंस के लिए शुल्क तय किया जाएगा।
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ऐसे काम करता है लेजर
इस प्रक्रिया में एक पतली ट्यूब (कैथेटर) के जरिये लेजर किरणों को ब्लॉक हुई नस तक पहुंचाया जाता है। यह लेजर ऊर्जा नस के अंदर जमे हुए प्लाक (कठोर कचरा) या खून के थक्कों को भाप बनाकर उड़ा देती है। इस प्रक्रिया से पारंपरिक बाईपास सर्जरी टाली जा सकती है।
Iयह नई मशीन उन मरीजों के लिए आशा की किरण है, जिन्हें पहले ही कई उपचार मिल चुके हैं। ऐसे मरीज जिनके लिए एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी जोखिम भरी मानी जाती है, वे भी इसका लाभ उठा सकते हैं। केजीएमयू का लक्ष्य इस उन्नत तकनीक से अधिक मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार देना है। यह पहल संस्थान को हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी। I
I- प्रो. ऋषि सेठी, विभागाध्यक्ष, लारी कार्डियोलॉजी, केजीएमयूI
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केजीएमयू में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रवक्ता डॉ. अक्षय प्रधान ने बताया कि यह मशीन उन मरीजों के दिल के जटिल ब्लॉक खोलने में सहायक होगी, जिन्हें पारंपरिक उपचार विधियों से लाभ नहीं मिला है। मुख्य रूप से इस मशीन के माध्यम से जटिल ब्लॉक को खोलने, कैल्शियम जमा होने या फिर पहले से पड़े स्टेंट में ब्लॉकेज खोले जा सकते हैं। लेजर जमे हुए कैल्शियम को नरम कर देता है। इसके बाद उन्हें गुब्बारे के माध्यम से हटा दिया जाता है।
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लेजर उन मरीजों के मामले में भी उपयोगी है, जिनमें पहले से ही स्टेंट पड़ा होने से दूसरा स्टेंट नहीं डाला जा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित है। केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि यह मशीन राज्य सरकार से मिले अनुदान से खरीदी गई है। इसलिए फिलहाल इसका कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। एक वर्ष के बाद मेंटेनेंस के लिए शुल्क तय किया जाएगा।
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ऐसे काम करता है लेजर
इस प्रक्रिया में एक पतली ट्यूब (कैथेटर) के जरिये लेजर किरणों को ब्लॉक हुई नस तक पहुंचाया जाता है। यह लेजर ऊर्जा नस के अंदर जमे हुए प्लाक (कठोर कचरा) या खून के थक्कों को भाप बनाकर उड़ा देती है। इस प्रक्रिया से पारंपरिक बाईपास सर्जरी टाली जा सकती है।
Iयह नई मशीन उन मरीजों के लिए आशा की किरण है, जिन्हें पहले ही कई उपचार मिल चुके हैं। ऐसे मरीज जिनके लिए एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी जोखिम भरी मानी जाती है, वे भी इसका लाभ उठा सकते हैं। केजीएमयू का लक्ष्य इस उन्नत तकनीक से अधिक मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार देना है। यह पहल संस्थान को हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी। I
I- प्रो. ऋषि सेठी, विभागाध्यक्ष, लारी कार्डियोलॉजी, केजीएमयूI

डॉ. अक्षय प्रधान।