69 हजार शिक्षक भर्ती: सरकार ने दिया डेढ़ गुना अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट करने का प्रस्ताव
यूपी के प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई शुक्रवार को जारी रहेगी। बृहस्पतिवार को सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से मौखिक प्रस्ताव रखा गया कि अगर याची अभ्यर्थी सरकार की ओर से निर्धारित क्वालिफाइंग मार्क्स से संतुष्ट नहीं हैं तो मेरिट से समझौता किए बगैर कुल पदों से डेढ़ गुना अभ्यर्थियों को छांटकर (शॉर्टलिस्ट कर) उनकी सूची बनाई जा सकती है।
याचियों की तरफ से इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा गया कि ऐसे में शिक्षामित्रों का चयन संभव नहीं होगा। लिहाजा राज्य सरकार को क्वालिफाइंग मार्क्स 40 व 45 फीसदी ही तय करने चाहिए।
राज्य सरकार की तरफ से निर्धारित किए गए क्वालिफाइंग मार्क्स (सामान्य वर्ग 65 फीसदी व आरक्षित वर्ग 60 फीसदी) को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सैकड़ों शिक्षामित्रों की तरफ से दायर कई याचिकाओं पर न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ में फाइनल सुनवाई चल रही है। मामले में राज्य सरकार का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत चंद्रा रख रहे हैं। उनके साथ मुख्य स्थायी अधिवक्ता श्रीप्रकाश सिंह भी पेश हुए।
लिखित परीक्षा के बाद तय किए गए थे क्वालीफाइंग मार्क्स
69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए गत छह जनवरी को लिखित परीक्षा होने के बाद सात जनवरी को राज्य सरकार ने सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 65 फीसदी व अनारक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी क्वालिफाइंग मार्क्स तय किए थे।
इस मामले में गत 17 जनवरी को कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले में यथास्थिति बहाल रखने का अंतरिम आदेश दिया था। इसके बाद 30 जनवरी को याचिकाओं के अंतिम निपटारे तक यथास्थिति को जारी रखने का आदेश दे दिया। जिस पर लगातार सुनवाई हो रही है।
इससे पहले बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार की ओर से पेश मुख्य स्थायी अधिवक्ता से पूछा था कि क्या सरकार 7 जनवरी के शासनादेश के बगैर परीक्षा परिणाम घोषित करने को तैयार है?