आशियाना दुराचार कांड की पीड़िता को चार हफ्ते में दें मुआवजा : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के वर्ष 2005 के चर्चित आशियाना दुराचार कांड की पीड़िता को चार हफ्ते में दो लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश राज्य सरकार समेत डीएम को दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि रकम का 75 फीसदी तीन वर्ष के लिए उसके सावधि खाते और 25 प्रतिशत बचत खाते में जमा कराएं, जिसका वह उपयोग कर सकेगी।
न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने वकील आदर्श मेहरोत्रा की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया।
इसमें याची ने वर्ष 2006 में छपी खबर को आधार बनाकर पीड़िता को मुआवजा दिलाए जाने का आग्रह किया था। साथ ही कोर्ट ने भी मुआवजे के मुद्दे का खुद संज्ञान लिया था। याची अधिवक्ता का कहना था कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी।
उसे 9 मई 2005 से 8 दिसम्बर 2006 तक पिता की सहमति के बगैर महिला संरक्षण गृह में रखा गया, जो अवैध था। इसके लिए याची ने पीड़िता को राज्य सरकार से मुआवजा दिलाने की गुजारिश की थी।
कोर्ट ने डीएम व राज्य महिला आयोग की सचिव से मांगा था जवाब
इसे लेकर कोर्ट ने डीएम समेत राज्य महिला आयोग की सचिव से जवाब तलब किया था। अदालत ने दोनों को निर्देश दिया था कि विस्तृत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि क्या पीड़िता को कोई मुआवजा दिया गया या नहीं।
पीड़िता को भी यह जिक्र करते हुए हलफनामा पेश करने को कहा था कि उसे कोई मुआवजा मिला या नहीं। इससे पहले अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने कोर्ट को बताया था कि इस याचिका के लंबित रहने के दौरान 18 अप्रैल 2016 को सत्र अदालत ने मामले के आरोपियों को सजा सुनाते हुए पीड़िता को दो लाख रुपये बतौर मुआवजा देने को कहा था।
डीएम ने जवाबी हलफनामे में कहा कि पीड़िता को अभी तक उक्त मुआवजा नहीं मिला है। इसकी प्रक्रिया चल रही है और उसे जल्द भुगतान कर दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने उक्त निर्देश देकर याचिका निस्तारित कर दी।