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सुना है क्या: साइकिल! न बाबा न, इसमें भी चाहिए महिला आरक्षण; नहले पर दहला के पढ़ें किस्से

Sat, 16 May 2026 12:16 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 16 May 2026 12:16 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
 

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Have You Heard? The Bicycle! Oh, Come On—Now Even *That* Needs Women's Reservation? Read These Tales of One-Up
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'साइकिल! न बाबा न' की कहानी। इसके अलावा 'इसमें भी चाहिए महिला आरक्षण' और 'नहले पर दहला' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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साइकिल! न बाबा न

पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर सड़क पर दिख रहा है। एक तरफ माननीय कार से साइकिल पर आ गए हैं तो दूसरी तरफ साहबों को साइकिल से डर लग रहा है। इसकी वजह सेहत नहीं बल्कि चुनाव चिह्न है। पिछले दिनों ब्यूरोक्रेसी भवन में साइकिल की सवारी पर बड़े-बड़े साहब चर्चा में लीन थे।

मंथन चल रहा था कि कौन कब साइकिल खरीदेगा? तभी एक कद्दावर साहब बोले...चाहे जो हो जाए, मैं साइकिल की सवारी नहीं करूंगा। काहे... जवाब मिला... नौ साल पहले साइकिल चलाना छोड़ दिया। इस पर ठहाके लग गए।
 

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इसमें भी चाहिए महिला आरक्षण

देश-प्रदेश में बच्चों का भविष्य गढ़ने वाले गुरुजी लोग आज कल एक सुप्रीम आदेश से परेशान हैं। वे इसके लिए सड़क से सदन तक लड़ रहे हैं। वहीं, हाल ही में बड़ी अदालत में उस समय कुछ शिक्षक असहज हो गए, जब उनके ही बीच से महिला गुरुजी को विशेष राहत की मांग उठा दी।

इस पर चुटकी लेते हुए एक गुरुजी ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि इसमें भी चाहिए महिला आरक्षण। कम से कम यहां पर तो सबके हित की बात उठानी चाहिए थी। इस पर काफी गुरुजनों ने खूब चुटकी ली है।

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नहले पर दहला

सेहत सुधार से जुड़ी एक यूनिट के मुखिया अफसर कम, राजनीतिज्ञ ज्यादा हो गए हैं। उनकी राजनीतिक चाल से पूरी यूनिट परेशान है। पिछले दिनों कर्मचारी संगठन से जुड़े एक नेता उनके पास अपने सहयोगी से जुड़ा एक गोपनीय पत्र लेकर गए। शिकायत की कि सहयोगी गड़बड़ है। इस मुखिया ने मामले की जांच कराने की बात कौन कहे, आरोपी को ही शिकायती पत्र थमा दिया। यह भी बता दिया कि उसे यह पत्र किसने दिया है? ऐसे में अब विभाग में हलचल मची है?
 
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