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सुना है क्या: अपने घर पर ही प्रवास, चर्चा में साहब का राशिफल; 'साहब को उत्तराधिकारी की तलाश' की पढ़ें किस्से

Sat, 03 Oct 2026 10:58 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 03 Oct 2026 10:58 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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Have you heard? 'Sahab' is staying at his own residence, and his horoscope is the talk of the town; read the s
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'अपने घर पर ही प्रवास' की कहानी। इसके अलावा 'चर्चा में साहब का राशिफल' और 'साहब को उत्तराधिकारी की तलाश' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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अपने घर पर ही प्रवास

नेता प्रचार के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं? गंगा किनारे की एक नगरी के माननीय ने तो कमाल कर दिया। अपने क्षेत्र में ही प्रवास का कार्यक्रम बना डाला। आसपास वाले अचरज में हैं कि कोई अपने ही घर में प्रवास कैसे करता है? खैर माननीय बड़ी मुश्किल से चुनाव जीत पाए थे। जनता ने सदन में उनका प्रवास नहीं होने का पूरा मन बना लिया था। लिहाजा अगले चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। इस बार हार की नौबत आई तो राजनीति छोड़ कहीं और प्रवास करना पड़ सकता है।

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चर्चा में साहब का राशिफल

खुद को नास्तिक बताने वाले प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के साहब का राशिफल चर्चा में है। चर्चा हो भी क्यों न? साहब नास्तिक हैं लेकिन रोज सुबह अपना राशिफल पढ़कर आते हैं। साथ ही अपने मातहतों से कहते हैं, मेरे राशिफल में लिखा है कि मेरे विरोधी आसपास ही रहते हैं। अब यह चर्चा विभाग में आम होती जा रही है। अधिकारी-कर्मचारी इस पर चटखारे भी ले रहे हैं।

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साहब को उत्तराधिकारी की तलाश

उम्र के 73 बसंत देख चुके प्रदेश में एक बड़ी खेल एसोसिएशन के मुखिया को लंबे समय से उत्तराधिकारी की तलाश है, जो पूरी हाेने का नाम नहीं ले रही है। खेल विधेयक के फेर में साहब की कुर्सी जानी तय है और वह इसे स्वीकार भी चुके हैं। हालांकि, साहब का मानना है कि उनकी जगह लेने वाला कम से कम खेलों के महत्व को समझ सके लेकिन उन्हें कोई ऐसा मिला नहीं है। अब देखने वाली बात होगी कि उनकी तलाश आखिर कब पूरी होगी?

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