{"_id":"6810c0959bf3599914028a97","slug":"growth-and-sexual-disturbances-confirmed-juvenile-arthritis-patients-2025-04-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शोध: आर्थराइटिस पीड़ित किशोरों में धीमी गति से आ रहा यौवन, KGMU की रिसर्च में सामने आए हैरान करने वाले तथ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शोध: आर्थराइटिस पीड़ित किशोरों में धीमी गति से आ रहा यौवन, KGMU की रिसर्च में सामने आए हैरान करने वाले तथ्य
Tue, 29 Apr 2025 06:26 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 29 Apr 2025 06:26 PM IST
सार
केजीएमयू ने किशोर आर्थराइटिस पर शोध किया है जिसमें हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह शोध किशोर आर्थराइटिस से पीड़ित 107 रोगियों पर किया गया है जिसे पीडियाट्रिक रुमेटोलॉजी के ताजा अंक में प्रकाशित किया गया है।
विज्ञापन
केजीएमयू लखनऊ (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
किशोर आर्थराइटिस (जुवेनाइल आइडियोपेथिक आर्थराइटिस) के पीड़ितों में सामान्य समस्याओं के साथ ही शारीरिक विकास और यौन संबंधी गड़बड़ी भी होती हैं। किंग जाॅर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में हुए अध्ययन में यह निष्कर्ष निकलकर आया है। इस अध्ययन को पीडियाट्रिक रुमेटोलाॅजी के ताजा अंक में स्थान मिला है।
यह अध्ययन सायन मुखर्जी, अभिलाष कृष्णन विजयकुमारन, मुकेश कुमार मौर्य, निशांत गौतम कांबले, अंकुश पीएम, पुनीत कुमार, वाहिद अली, माला कुमार, सौरभ कुमार, पंक्ति मेहता, टीजी सुंदरम और उर्मिला धाकड़ ने किया है। इसमें पाया गया कि किशोर आर्थराइटिस के एक तिहाई मरीजों में विकास और यौवन संबंधी गड़बड़ी देखी जाती है। इसकी मुख्य वजह ग्रोथ हाॅर्मोन और इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर-1 में असंतुलन होना है।
ये भी पढ़े- यूपी: आज से दो दिन के दौर पर रायबरेली पहुंच रहे हैं राहुल गांधी, बूथ अध्यक्षों से करेंगे सीधी बात; जाएंगे रेल कोच फैक्ट्री
विज्ञापन
ग्रोथ हॉर्मोन लिवर को इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर -1 का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है। इससे हड्डी और अंगों का विकास होता है। केजीएमयू के रुमेटोलाॅजी विभाग में आर्थराइटिस से पीड़ित 107 बच्चों पर यह अध्ययन जुलाई 2021 से जनवरी 2023 के बीच किया गया। इसमें 35 लड़कियां भी थीं। ये सभी छह महीने से ज्यादा समय से किशोर गठिया से पीड़ित थीं। इलाज के दाैरान एक साल की अवधि में इनके शारीरिक विकास और हाॅर्मोन संबंधी बदलावों की जांच विभिन्न टेस्ट के माध्यम से की गई। इसमें देखा गया कि एक तिहाई में विकास और यौन संबंधी गड़बड़ियां थीं।
ये भी पढ़े- UP News: मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी से IAS बनने तक, पढ़ें गोंडा की बिटिया की संघर्ष से लेकर सफलता तक की कहानी
कम लंबाई, वजन और बीएमआई की मिली समस्या
अध्ययन में देखा गया कि 20.6 फीसदी बच्चों की लंबाई सामान्य से कम थी। 22.4 फीसदी बच्चे सामान्य से कम वजन और 25.2 फीसदी बच्चे लंबाई के अनुसार कम वजन (बीएमआई) के थे। 22.4 फीसदी बच्चे धीमे विकास से पीड़ित थे।
विज्ञापन
यह अध्ययन सायन मुखर्जी, अभिलाष कृष्णन विजयकुमारन, मुकेश कुमार मौर्य, निशांत गौतम कांबले, अंकुश पीएम, पुनीत कुमार, वाहिद अली, माला कुमार, सौरभ कुमार, पंक्ति मेहता, टीजी सुंदरम और उर्मिला धाकड़ ने किया है। इसमें पाया गया कि किशोर आर्थराइटिस के एक तिहाई मरीजों में विकास और यौवन संबंधी गड़बड़ी देखी जाती है। इसकी मुख्य वजह ग्रोथ हाॅर्मोन और इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर-1 में असंतुलन होना है।
विज्ञापन
ये भी पढ़े- यूपी: आज से दो दिन के दौर पर रायबरेली पहुंच रहे हैं राहुल गांधी, बूथ अध्यक्षों से करेंगे सीधी बात; जाएंगे रेल कोच फैक्ट्री
विज्ञापन
ग्रोथ हॉर्मोन लिवर को इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर -1 का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है। इससे हड्डी और अंगों का विकास होता है। केजीएमयू के रुमेटोलाॅजी विभाग में आर्थराइटिस से पीड़ित 107 बच्चों पर यह अध्ययन जुलाई 2021 से जनवरी 2023 के बीच किया गया। इसमें 35 लड़कियां भी थीं। ये सभी छह महीने से ज्यादा समय से किशोर गठिया से पीड़ित थीं। इलाज के दाैरान एक साल की अवधि में इनके शारीरिक विकास और हाॅर्मोन संबंधी बदलावों की जांच विभिन्न टेस्ट के माध्यम से की गई। इसमें देखा गया कि एक तिहाई में विकास और यौन संबंधी गड़बड़ियां थीं।
ये भी पढ़े- UP News: मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी से IAS बनने तक, पढ़ें गोंडा की बिटिया की संघर्ष से लेकर सफलता तक की कहानी
कम लंबाई, वजन और बीएमआई की मिली समस्या
अध्ययन में देखा गया कि 20.6 फीसदी बच्चों की लंबाई सामान्य से कम थी। 22.4 फीसदी बच्चे सामान्य से कम वजन और 25.2 फीसदी बच्चे लंबाई के अनुसार कम वजन (बीएमआई) के थे। 22.4 फीसदी बच्चे धीमे विकास से पीड़ित थे।
एक लाख में 48 बच्चों में होती है समस्या
किशोर गठिया की समस्या एक लाख में औसतन 48 बच्चों में देखी जाती है। जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (जेआईए) पुरानी ऑटोइम्यून बीमारियों का एक समूह है, जो बच्चों और किशोरों को प्रभावित करता है। इसमें जोड़ों की सूजन, दर्द और कठोरता की समस्या होती है।
लक्षण: बुखार और थकान, आंख की सूजन, जोड़ों में दर्द और सूजन, जोड़ों में अकड़न, त्वचा पर चकत्ते।
कारण: आनुवांशिक, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, खराब पर्यावरण
लक्षण: बुखार और थकान, आंख की सूजन, जोड़ों में दर्द और सूजन, जोड़ों में अकड़न, त्वचा पर चकत्ते।
कारण: आनुवांशिक, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, खराब पर्यावरण