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केजीएमयू में समूह ग की नियुक्तियों में गड़बड़ी पर राज्यपाल कार्यालय ने मांगा जवाब
Sun, 20 Dec 2020 09:58 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sun, 20 Dec 2020 09:58 PM IST
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- फोटो : गूगल
केजीएमयू में समूह ग की नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी के मामले में राज्यपाल कार्यालय ने नए सिरे से जवाब मांगा है। राज्यपाल के विशेष कार्य अधिकारी ने केजीएमयू प्रशासन को पत्र भेजकर पूरी स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है।
केजीएमयू में वर्ष 2004-5 में समूह ग के तहत नियुक्तियां हुई थीं। शासन के निर्देश पर तत्कालीन कमिश्नर ने जांच की तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिलीं। मामला हाईकोर्ट में भी पहुंचा। जनहित याचिका में सुनवाई होने से पहले केजीएमयू प्रशासन ने पूरे प्रकरण में शामिल 15 प्रोफेसरों को बचाने की रणनीति अपनाई। चयन कमेटी में शामिल सभी प्रोफेसरों को एक नई कमेटी बनाकर क्लीन चिट दे दी गई। यह भी कहा गया कि इस पूरे प्रकरण के लिए तत्कालीन कुलसचिव जिम्मेदार हैं। ऐसे में यह प्रकरण श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के पास पहुंचा।
उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। अब राज्यपाल कार्यालय ने केजीएमयू प्रशासन से इस मामले में जानकारी मांगी है। केजीएमयू प्रशासन को भेजे गए पत्र में 2012 में हुई जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है।
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केजीएमयू में वर्ष 2004-5 में समूह ग के तहत नियुक्तियां हुई थीं। शासन के निर्देश पर तत्कालीन कमिश्नर ने जांच की तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिलीं। मामला हाईकोर्ट में भी पहुंचा। जनहित याचिका में सुनवाई होने से पहले केजीएमयू प्रशासन ने पूरे प्रकरण में शामिल 15 प्रोफेसरों को बचाने की रणनीति अपनाई। चयन कमेटी में शामिल सभी प्रोफेसरों को एक नई कमेटी बनाकर क्लीन चिट दे दी गई। यह भी कहा गया कि इस पूरे प्रकरण के लिए तत्कालीन कुलसचिव जिम्मेदार हैं। ऐसे में यह प्रकरण श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के पास पहुंचा।
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उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। अब राज्यपाल कार्यालय ने केजीएमयू प्रशासन से इस मामले में जानकारी मांगी है। केजीएमयू प्रशासन को भेजे गए पत्र में 2012 में हुई जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है।
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