राज्यपाल बोले, सोशल मीडिया में पत्रकारिता वाला गुण नहीं
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मौजूदा समय में सोशल मीडिया सूचनाओं का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। लोग इसे पत्रकारिता की नई कड़ी के रूप में देख रहे हैं, पर ऐसा नहीं है। सोशल मीडिया केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है। इसमें पत्रकारिता वाला गुण नहीं है।
राज्यपाल राम नाईक ने सोशल मीडिया पर ये विचार सोमवार को व्यक्त किए। वे लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में देवर्षि नारद जयंती पर हुई गोष्ठी में बोल रहे थे। गोष्ठी का विषय ‘पत्रकार धर्म व चुनौतियां’ था। इस मौके पर उन्होंने कई पत्रकारों को सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सच्ची खबर देना है। यही पत्रकार का धर्म है। पत्रकारिता देश हित के लिए होनी चाहिए। पहले लोग संपादकीय जरूर पढ़ते थे। अब इस आदत में गिरावट आ रही है, जबकि एक समय ऐसा भी था कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को एक संपादकीय लिखने की वजह से सात साल का कारावास तक भुगतना पड़ा था।
'विचार पढ़ने व देने में रुचि समाप्त हो रही है'
राज्यपाल ने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान समय में लोगों में विचार देने व पढ़ने की रुचि समाप्त हो रही है।
इस मौके पर केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, राज्यसभा सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा, पत्रकार ब्रजेश मिश्र, वरिष्ठ स्तंभकार राजनाथ सिंह सूर्य ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पुनीत द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन मंजुल रंजन ने दिया।
इनका हुआ सम्मान
पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल राम नाईक ने वरिष्ठ स्तंभकार हृदय नारायण दीक्षित, नंदकिशोर श्रीवास्तव, आलोक त्रिपाठी, राजीव वाजपेई, रंजना, प्रेम शंकर मिश्रा, राजेंद्र गौतम, डॉ. मोहम्मद नसीमुद्दीन नदवी, रीतेश सिंह और स्वाती माथुर को सम्मानित किया।