एमएलसीः 4 नामों पर फैसला, 5 को राज्यपाल ने रोका
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 9 रिक्त स्थानों पर 4 नये सदस्यों के नामों की घोषणा कर दी है। आज सुबह जब मुख्यमंत्री अचानक ही राजभवन राज्यपाल से मिलने गए थे तभी से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि चर्चा एमएलसी के इन नामों पर ही होनी है।
विधान परिषद में मनोनयन के लिए सरकार की ओर से भेजी गई नौ नामों की सूची में से चार नामों पर राज्यपाल राम नाईक ने अपनी मुहर लगा दी
है। एसआरएस यादव, लीलावती कुशवाहा, रामवृक्ष यादव तथा जितेंद्र यादव के एमएलसी बनने का रास्ता साफ हो गया है।
नामित किए जाने वाले शेष पांच लोगों के बारे में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से फिर रिपोर्ट तलब की है। बृहस्पतिवार को नाईक ने अखिलेश को राजभवन बुलाकर अपने इस फैसले की जानकारी दी।विधान परिषद में नौ सदस्यों के मनोनयन को लेकर पिछले लगभग डेढ़ महीने से राजभवन और सरकार के बीच खींचतान चल रही है।
सरकार की ओर से भेजे गए नामों पर पूरी तरह संतुष्ट न होने की वजह से राज्यपाल ने सूची में शामिल कई लोगों के बारे में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। सूची का गहन परीक्षण करने के बाद चार नामों पर पूरी तरह संतुष्ट हो जाने पर राज्यपाल ने आज इनके नामों पर सहमति दे दी।
मुख्यमंत्री को निर्णय से अवगत कराया
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को इन नामों से अवगत करा दिया है। एमएलसी के लिए चुने गए इन चार लोगों के अलावा मुख्यमंत्री की ओर से जो सूची सौंपी गई थी उसमें कमलेश कुमार पाठक, श्री संजय सेठ, श्री रणविजय सिंह, श्री अब्दुल सरफराज खां तथा डाँ. राजपाल कश्यप कश्यप के नाम भी शामिल हैं।
राज्यपाल को बाकी बचे इन पांच नामों पर कुछ आपत्तियां थीं। राज्यपाल ने उपरोक्त 5 लोगों के बारे में प्राप्त शिकायती प्रत्यावेदनों को मुख्यमंत्री को भेजते हुए कहा है कि आरोपों की सत्यता की जांच करने के बाद उन्हें इससे अवगत कराया जाए ताकि वह बचे हुए नामों पर विचार कर सकें।
मालूम हो कि राज्यपाल को इन 5 व्यक्तियों के संबंध में विभिन्न शिकायतकर्ताओ और संगठनों द्वारा शिकायती पत्रों के माध्यम जो सूचनाएं प्राप्त हुयी थी जो उनके द्वारा दिये गये शपथ पत्र में उल्लेखित नहीं थी।
राज्यपाल के बुलावे पर मुख्यमंत्री आज दोपहर 12 बजे राजभवन पहुंचे और करीब 45 मिनट तक नाईक व उनके बीच बातचीत हुई। राज्यपाल ने शेष पांच लोगों केबारे में मिले शिकायती पत्रों को मुख्यमंत्री को भेजते हुए कहा है कि आरोपों की सत्यता-असत्यता की जांच कराकर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए ताकि उन्हें विधान परिषद में नामित करने के लिए सम्यक विचार किया जा सके।