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आजम को राजभवन से लग सकता है एक और ‘झटका’

Sun, 08 May 2016 02:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 08 May 2016 02:34 AM IST
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Governor house can create a trouble for Azam Khan.
आजम खान

अखिलेश सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खां को राजभवन से एक और ‘झटका’ लग सकता है। नगर निगम (संशोधन) विधेयक के बाद अब ‘उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015’ को भी राजभवन की हरी झंडी मिलने के आसार कम ही दिखाई दे रहे हैं।

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राजभवन में अब एकमात्र यही विधेयक लंबित है। फिलहाल राज्यपाल इस विधेयक की संवैधानिकता और औचित्य का परीक्षण करा रहे हैं। माना जा रहा है कि राज्यपाल इसे पुनर्विचार के लिए राज्य सरकार को लौटा सकते हैं या फिर राष्ट्रपति के विचारार्थ संदर्भित कर सकते हैं।
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राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर रुतबा बढ़ाने की आजम की मंशा पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है। विधेयकों को लेकर आजम की बयानबाजी से आहत राज्यपाल राम नाईक ने इसी सप्ताह लंबित विधेयकों पर धड़ाधड़ फैसला करते हुए कुछ को पुनर्विचार के लिए सरकार को लौटा दिया तो कुछ को राष्ट्रपति के विचारार्थ संदर्भित कर दिया।
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अब सबकी निगाहें अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक पर लगी हैं। राजभवन के सूत्रों की मानें तो इस विधेयक पर भी राज्यपाल जल्द ही फैसला करेंगे।

संवैधानिक पद न होने के कारण नहीं दे रहे दर्जा

Governor house can create a trouble for Azam Khan.

राजभवन का मानना है कि अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन का पद संवैधानिक पद नहीं है, इसलिए उसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग तथा अन्य आयोगों के अध्यक्षों को राज्यमंत्री का ही दर्जा मिला हुआ है। ऐसे में यदि किसी एक आयोग के चेयरमैन को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने से विसंगति पैदा होगी और यह दूसरे आयोगों के  चेयरमैन के साथ भेदभाव होगा। अन्य राज्यों यहां तक कि केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त नहीं है।

इसलिए भी इस विधेयक को लेकर सवाल खडे़ हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी अपने आदेशों में साफ किया है कि गैरसंवैधानिक पदों पर नियुक्ति पाने वालों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।

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