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वैक्सिनेशन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की बाध्यता खत्म करे सरकार: संजय सिंह
Wed, 12 May 2021 08:59 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 12 May 2021 08:59 PM IST
सार
आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी व सांसद संजय सिंह ने वैक्सीन लगवाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की बाध्यता पर सवाल उठाया है।
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आप नेता संजय सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी व सांसद संजय सिंह ने वैक्सीन लगवाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की बाध्यता पर सवाल उठाया है। उन्होंने इस बारे में सरकार से जबाब मांगा है कि जो लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने में असमर्थ हैं उनका वैक्सीनेशन कैसे होगा ? इसके अलावा उन्होंने कोरोना से संक्रमित होकर मरने वाले सरकारी कार्मिकों को एक करोड़ की आर्थिक मदद देने की भी मांग उठाई है।
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उन्होंने कहा कि ग्रमीण इलाकों में रहने वाली प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी के पास न स्मार्टफोन है, न गांव में कोई साइबर कैफ़े है। ऐसे में इनका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। इसलिए सरकार को पंजीकरण कराने में असमर्थ लोंगो के वैक्सिनेशन कराने की व्यवस्था करना चाहिए । आप सांसद ने कहा कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी में कोरोना के मारे गए कार्मिकों को आर्थिक मदद दिए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आप द्वारा शिक्षक, शिक्षामित्र, शिक्षा अनुदेशक और कर्मचारियों के परिजनों को एक करोड़ रुपए के मुआवजे दिए जाने की मांग पर हाई कोर्ट ने भी मुहर लगा दिया है। संजय सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव में कोविड गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया है। इसलिए 2 हजार से शिक्षकों, कर्मचारियों की जान चली गई है।
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गंगा में लाश मिलने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बदइंतजामी का आलम यह है कि कूड़े की गाड़ी और ठेले से शव ढोए जा रहे हैं। कोरोना से मरने वालों की अधजली लाशों को कुते नोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंसान को न तो इलाज मिल रहा है और न ही मरने वाले का उसके धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि शामली के जलालाबाद में एक महिला की मौत के बाद एंबुलेंस न मिल पाने के बाद परिजनों को कूड़े की गाड़ी से शव को श्मशान घाट तक लेकर जाना पड़ा। जबकि गोरखपुर के बड़हलगंज कस्बे में कोरोना संक्रमित का निधन हो जाने पर परिजनों ने ठेले से शव को श्मशान घाट पहुंचाया। ऐसे कई प्रमाण हैं जो सरकार की व्यवस्था की पोल खोल रहे है।
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