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अभिलेखों में फर्जीवाड़ा: अपनी खामी छिपाने के लिए मुर्दों के खिलाफ कराया मुकदमा

Sat, 30 Jul 2022 06:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो gonda, uttar pradesh, india
gonda, uttar pradesh, india Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 30 Jul 2022 06:57 PM IST
सार

भू संपत्तियों के अभिलेखों में फर्जीवाड़ा छिपाने के लिए मुर्दों के खिलाफ तक मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है। मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। खुलासे पर चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है।

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case filed against dead people to hide irregularities.
फोटो-13-गोंडा में स्थित उप निबंधक सदर का कार्यालय। -संवाद - फोटो : GONDA

विस्तार

कलेक्ट्रेट के रजिस्ट्री कार्यालय में भू संपत्तियों के बैनामा अभिलेख भी सुरक्षित नहीं हैं। इतना ही नहीं अभिलेखों में फर्जीवाड़ा करने के मामले में अपनों की खामी छिपाने को मुर्दों तक पर मुकदमा दर्ज कराने से गुरेज नहीं बरता जा रहा है। उच्चाधिकारियों के आदेश पर हुई जांच में उपनिबंधक सुधा यादव ने इस खेल का भंडाफोड़ करने का दावा करते हुए चार लोगों के खिलाफ कोतवाली पुलिस में मामला दर्ज कराया। इस मामले में जब पुलिस ने जांच पड़ताल की तो सामने आया कि निबंधन कार्यालय की तरफ से जिन चार लोगों पर केस दर्ज कराया गया है व चारों मृतक हैं। अब पुलिस इस फर्जीवाड़े से जुड़े वास्तविक खिलाड़ियों की खोज में जुटी है। इससे निबंधन कार्यालय में हड़कंप है।

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रजिस्ट्री दफ्तर में फर्जीवाड़े की शिकायत मधु मेहरोत्रा व अन्य ने 25 जुलाई की थी। एडीएम व सहायक महानिरीक्षक के आदेश पर मामले की जांच शुरू हुई। उपनिबंधक सुधा यादव ने पूरे मामले की छानबीन दो दिनों तक की। जांच में मिला कि कार्यालय में खंड संख्या 1621 के विलेख संख्या 8349 से सुनील कुमार व अनूप कुमार निवासी जानकी नगर ने एक एकड़ 32 डिस्मिल भूमि का बैनामा कलावती उर्फ पार्वती, निवासी नंदौर तहसील करनैलगंज को किया था। जांच में इंडेक्स रजिस्टर देखा गया तो वह जीर्ण-शीर्ण स्थिति में मिला।

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मिलान न होने पर संरक्षित बही नंबर-आठ जो अंगूठे के निशान से संबंधित अभिलेख हैं, से मिलान में जमीन बैनामा करने वाले सुनील और अनूप के साथ ही गवाह के नाम का कोई रिकार्ड नहीं मिला। कैश रजिस्टर की जांच में विलेख संख्या 8349 में इन दोनों के बजाए राजकुमारी का नाम दर्ज मिला। राजकुमारी के नाम के साथ ही गवाह का नाम रविंद्र दर्ज मिला। बैनामा प्रपत्र में बतौर गवाह खेदु निवासी ठडवरिया व सत्य नरायण निवासी पूरे तिवारी का नाम दर्ज मिला। इस तरह खंड संख्या 1621 के विलेख संख्या 8349 में हुआ फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में उपनिबंधक ने माना कि विलेख संख्या यानि बैनामा प्रपत्र 8349 फर्जी है, और उसे अभिलेख में शामिल कराया गया है। निबंधन कार्यालय के लोगों ने अपने को इस मामले में पाक साफ दिखाने के लिए सुनील, अनूप, खेदू व सत्यनारायण के खिलाफ कोतवाली नगर पुलिस में केस भी दर्ज करा दिया।

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एफआईआर दर्ज करने के बाद जब इस पूरे मामले की प्रारंभिक विवेचना की गयी तो उजागर हुआ कि उप निबंधन कार्यालय की तरफ से जिन चार आरोपियों के खिलाफ फर्जीवाड़े का केस दर्ज कराया है, उनकी तो पहले ही मृत्यु हो चुकी है। पुलिस अब इस मामले की तह तक जाने के लिए सघन जांच पड़ताल में जुटी है। पंकज कुमार सिंह, कोतवाल


रजिस्ट्री कार्यालय सदर में संरक्षित अभिलेख में फर्जीवाड़े की जांच कराई गई है। जो तथ्य सामने आए हैं, उसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई है। इसके अलावा विभागीय जांच हो रही है, जो भी इसमें दोषी मिलेगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। मनोज कुमार श्रीवास्तव, सहायक महानिरीक्षक निबंधन गोंडा

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