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Lucknow News: खून से लथपथ बेटे व भतीजी को देख बेहोश हो गईं गोल्डी
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लखनऊ। स्कूटी पर गोल्डी के पीछे भतीजी नित्या और उसके पीछा बेटा उत्कर्ष बैठा था। गोल्डी सौभाग्यम चौराहे के बीच में पहुंची ही थीं कि बेकाबू कार ने स्कूटी में पीछे से टक्कर मार दी। इससे तीनों उछलकर गिरे और लहूलुहान हो गए। खुद जख्मी होने पर भी गोल्डी बेटे और भतीजी की तरफ बढ़ने का प्रयास कर रही थीं। चंद मिनट तक वह बिलखती रहीं और फिर बेहोश हो गईं। जिसने भी इस हादसे का मंजर देखा वह हैरान-परेशान हो गया।
गोल्डी को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब पांच घंटे बाद होश आने पर उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया। होश में आते ही वह बेटे उत्कर्ष व भतीजी नित्या के बारे में पूछने लगीं। इस पर परिजनों ने बताया कि बच्चों का इलाज चल रहा है। परिवार वाले गोल्डी को इस हालत में उत्कर्ष की मौत की बात नहीं बता सके।
नरेंद्र और उनके भाई गोविंद वृंदावन सेक्टर-10 में परिवार के साथ रहते हैं। नरेंद्र हर दिन सुबह अपने बेटे उत्कर्ष व भतीजी नित्या को स्कूल छोड़ने जाते थे। दोपहर में उनकी पत्नी गोल्डी दोनों बच्चों को स्कूल से घर लाती थीं। गोल्डी का दूसरा बेटा नैतिक उसी स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता है, जो साइकिल से आता-जाता है। गोविंद की पत्नी और गोल्डी दोनों सगी बहने हैं। हादसे के बाद पूरे परिवार में मातम पसर गया।
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इलाकाई निवासी व समाजसेवी नरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जहां पर हादसा हुआ, उस रूट पर काफी तेज रफ्तार में वाहन गुजरते हैं। इस तरह के हादसे की हर वक्त आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि चौराहे पर कोई ब्रेकर नहीं बने हैं। अगर ब्रेकर हों तो चौराहा पार करने से पहले चालक वाहनों की गति धीमी करें। उन्होंने कहा- इस चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जरूरत है।
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गोल्डी को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब पांच घंटे बाद होश आने पर उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया। होश में आते ही वह बेटे उत्कर्ष व भतीजी नित्या के बारे में पूछने लगीं। इस पर परिजनों ने बताया कि बच्चों का इलाज चल रहा है। परिवार वाले गोल्डी को इस हालत में उत्कर्ष की मौत की बात नहीं बता सके।
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नरेंद्र और उनके भाई गोविंद वृंदावन सेक्टर-10 में परिवार के साथ रहते हैं। नरेंद्र हर दिन सुबह अपने बेटे उत्कर्ष व भतीजी नित्या को स्कूल छोड़ने जाते थे। दोपहर में उनकी पत्नी गोल्डी दोनों बच्चों को स्कूल से घर लाती थीं। गोल्डी का दूसरा बेटा नैतिक उसी स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता है, जो साइकिल से आता-जाता है। गोविंद की पत्नी और गोल्डी दोनों सगी बहने हैं। हादसे के बाद पूरे परिवार में मातम पसर गया।
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इलाकाई निवासी व समाजसेवी नरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जहां पर हादसा हुआ, उस रूट पर काफी तेज रफ्तार में वाहन गुजरते हैं। इस तरह के हादसे की हर वक्त आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि चौराहे पर कोई ब्रेकर नहीं बने हैं। अगर ब्रेकर हों तो चौराहा पार करने से पहले चालक वाहनों की गति धीमी करें। उन्होंने कहा- इस चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जरूरत है।