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Lucknow News: पहले साल से जेनआई आधारित पढ़ाई रोजगार के लिए करेगी तैयार

Thu, 29 Jan 2026 02:37 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 02:37 AM IST
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GenI-based studies from the first year will prepare you for employment
लखनऊ। छात्रों की यात्रा उतार-चढ़ाव भरी होती है। पढ़ाई के बाद रोजगार एक बड़ा प्रश्न होता है। स्नातक में शुरुआत के दो साल तो दोस्तों के साथ निकल जाते हैं, लेकिन तीसरे साल से रोजगार को लेकर विद्यार्थी चिंतित होने लगते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस पर फोकस होकर काम कर रही है। युवा अवेयरनेस, एप्लीकेशन, एडाप्टीबिलिटी व बिहेवियर पर ध्यान देकर इसका समाधान पा सकते हैं।
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एआई मंथन में इवैलुएट एआई पुणे के संस्थापक आकाश सक्सेना ने शिक्षा से रोजगार विषय पर ये सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि एआई ने छात्रों के काम को बहुत आसान बना दिया है। इसके जरिये हम यह जान पाते हैं कि छात्र किस रोजगार के लिए उपयुक्त है। आकाश ने कहा कि हमें स्नातक पहले साल से ही सामान्य किताबी ज्ञान के साथ जेनआई (जेनरेटिव एआई) से छात्रों के प्रैक्टिकल ज्ञान पर जोर देना होगा। जेनएआई 10 दिन का काम 30 मिनट में कर रहा है। हमें पढ़ाई व परीक्षा में एआई का इस्तेमाल बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें विश्वविद्यालयों की सामान्य पढ़ाई के साथ सिमुलेशन आधारित, समस्या समाधान करने वाली पढ़ाई करनी होगी। सिमुलेशन के माध्यम से हम युवाओं को बाजार की वास्तविक जरूरत के लिए तैयार करते हैं।
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थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल जानकारी से जुड़े परीक्षा
लखनऊ। राज्य विश्वविद्यालयों की ओर से समय-समय पर आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में थ्योरी आधारित परीक्षा के साथ रियल वर्ल्ड, प्रैक्टिकल जानकारी से आधारित सवाल होने चाहिए। एआई मंथन में आईबीएम इंडिया की प्रोडक्ट मैनेजर सागरिका ने कहा कि एआई से ऑन द स्पॉट टेस्ट होगा। इससे छात्रों की कमियां जानकर उसे समय रहते दूर कर सकेंगे।
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सागरिका ने कहा कि हम छात्रों के मूल्यांकन के लिए निम्न, मध्यम व उच्च स्तर के कॉम्प्लेक्स आधारित पेपर तैयार कर सकते हैं। यह कहना गलत है कि आज के छात्रों को एआई के बारे में जानकारी नहीं है। वे खुद के स्टार्टअप एआई से बना रहे हैं। हमें उनके इनोवेशन को और प्रैक्टिकल जानकारी को बढ़ाने की जरूरत है। एआई बेस्ड सिमुलेशन से हम युवाओं को इनोवेशन की तरफ भी ला सकते हैं।


सागरिका ने एआई आधारित आईबीएम बॉब के बारे में बताया कि उसे निर्देश देने की भी जरूरत नहीं होती। वह छात्रों के लिए रियल वर्ल्ड डेटा देता है। यह छात्रों के लिए समस्या आधारित समाधान देने में काफी सहायक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को कोडिंग, इनोवेशन व थिंकिंग को बढ़ावा देने की जरूरत है।
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