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Lucknow News: परिष्कृत है जेन जी का सोच और रुचि- मालिनी अवस्थी
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लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।
लखनऊ। जेन जी का सोच और रुचि परिष्कृत है। वे साहित्य और संगीत को अच्छे से समझते हैं और रुचि भी रखते हैं। ये बातें पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने गोमती पुस्तक महोत्सव के पांचवे दिन बुधवार को लेखक यतींद्र मिश्र के साथ संगीत, साहित्य और जेन विषय पर बात करते हुए कहीं। इस दौरान उन्होंने लखनऊ और लविवि से जुड़े अपने किस्से भी साझा किए। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा जुड़े अनुभव साझा करते हुए दादरा की प्रस्तुति भी दी।
लेखक यतींद्र मिश्रा ने जेन जी को लेकर बात करते हुए बताया कि मैं सोशल मीडिया पर जो रील्स शेयर करता हूं उसमें पुराने गानों को शामिल करता हूं और यह मेरे युवा फॉलोअर्स को बेहद पसंद भी है। उन्होंने नई पीढ़ी से संवाद और विभिन्न पीढ़ियों के बीच समझ को महत्वपूर्ण बताया।
दास्तानगोई से विज्ञान तक बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता-
बाल मंडप में दास्तानगो आस्था और तस्नीम ने बच्चों को कहानी सुनाई। इसके बाद रंजीता और राहुल ने बच्चों को अभिनय की बारीकियों से परिचित कराया। विज्ञान सत्र में प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया गया। राष्ट्रीय ई पुस्तकालय एवं कविता पाठ में विद्यार्थियों ने नागार्जुन, कबीर और रवींद्रनाथ टैगोर सहित विभिन्न कवियों की रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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प्रत्येक लेखक के सृजन का तरीका अलग-
पुस्तक मेले में सृजन, साहित्य और संवेदना का संवाद विषय पर बोलते हुए लेखक एवं आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने कहा कि हर लेखक का सृजन का तरीका अलग होता है। उन्होंने अपने लेखन, साहित्यिक अनुभवों और रचनात्मक यात्रा पर विस्तार से बातचीत की। अपने साहित्यिक सफर की चर्चा करते हुए डॉ. हरिओम ने बताया कि उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और तीन पुस्तकों का अनुवाद भी हुआ है। इस दौरान उन्होंने संगीत के प्रति अपने लगाव को साझा करते हुए अपनी आवाज में कुछ गीत भी प्रस्तुत किए।
हिंदी दिवस पर विशेष कवि सम्मेलन-
पुस्तक महोत्सव में हिंदी दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन फरीदाबाद के कवि मंजीत सिंह ने किया। चिराग जैन, पंकज प्रसून, सर्वेश अस्थाना, डॉ. मालविका हरिओम और मनीषा शुक्ला ने काव्यपाठ किया। नृत्य निर्देशन एवं कोरियोग्राफी डॉ. सुरभि शुक्ला ने की। तबले पर डॉ. राजीव शुक्ला और गायन में पंडित रवि नागर ने संगत की। आकाशवाणी दिल्ली के कलाकार देवानंद झा ने गायन प्रस्तुति दी।
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लेखक यतींद्र मिश्रा ने जेन जी को लेकर बात करते हुए बताया कि मैं सोशल मीडिया पर जो रील्स शेयर करता हूं उसमें पुराने गानों को शामिल करता हूं और यह मेरे युवा फॉलोअर्स को बेहद पसंद भी है। उन्होंने नई पीढ़ी से संवाद और विभिन्न पीढ़ियों के बीच समझ को महत्वपूर्ण बताया।
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दास्तानगोई से विज्ञान तक बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता-
बाल मंडप में दास्तानगो आस्था और तस्नीम ने बच्चों को कहानी सुनाई। इसके बाद रंजीता और राहुल ने बच्चों को अभिनय की बारीकियों से परिचित कराया। विज्ञान सत्र में प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया गया। राष्ट्रीय ई पुस्तकालय एवं कविता पाठ में विद्यार्थियों ने नागार्जुन, कबीर और रवींद्रनाथ टैगोर सहित विभिन्न कवियों की रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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प्रत्येक लेखक के सृजन का तरीका अलग-
पुस्तक मेले में सृजन, साहित्य और संवेदना का संवाद विषय पर बोलते हुए लेखक एवं आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने कहा कि हर लेखक का सृजन का तरीका अलग होता है। उन्होंने अपने लेखन, साहित्यिक अनुभवों और रचनात्मक यात्रा पर विस्तार से बातचीत की। अपने साहित्यिक सफर की चर्चा करते हुए डॉ. हरिओम ने बताया कि उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और तीन पुस्तकों का अनुवाद भी हुआ है। इस दौरान उन्होंने संगीत के प्रति अपने लगाव को साझा करते हुए अपनी आवाज में कुछ गीत भी प्रस्तुत किए।
हिंदी दिवस पर विशेष कवि सम्मेलन-
पुस्तक महोत्सव में हिंदी दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन फरीदाबाद के कवि मंजीत सिंह ने किया। चिराग जैन, पंकज प्रसून, सर्वेश अस्थाना, डॉ. मालविका हरिओम और मनीषा शुक्ला ने काव्यपाठ किया। नृत्य निर्देशन एवं कोरियोग्राफी डॉ. सुरभि शुक्ला ने की। तबले पर डॉ. राजीव शुक्ला और गायन में पंडित रवि नागर ने संगत की। आकाशवाणी दिल्ली के कलाकार देवानंद झा ने गायन प्रस्तुति दी।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग और प्रदर्शनी देते कलाकार।