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Lucknow News: मोबाइल हैक कर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
Wed, 24 Jun 2026 01:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 24 Jun 2026 01:09 AM IST
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लखनऊ। क्राइम ब्रांच ने एपीके फाइल के जरिये मोबाइल हैक कर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मंगलवार को इस गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी मोबाइल हैक करने के बाद कॉन्टैक्ट लिस्ट में परिजनों के नंबर की जगह अपना नंबर जोड़कर ठगी करते थे।
एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि 5 मई को टीराज इंडस्ट्रीज के मालिक कुलवंत सिंह ने 18 लाख रुपये की साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी कंपनी के अकाउंट विभाग के व्हाट्सएप पर उनके बेटे का मेसेज मिला था। मेसेज के जरिये 18 लाख रुपये मांगे गए थे। विभाग ने धोखे में आकर रकम बताए गए खाते में स्थानांतरित कर दी। बाद में बेटे से बात करने पर ठगी का पता चला।
एपीके फाइल भेजकर हासिल करते थे मोबाइल का एक्सेस
एडीसीपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने ठगी का तरीका बताया। वे लोगों को मालवेयर एपीके फाइल का लिंक व्हाट्सएप पर भेजते थे। पीड़ित के लिंक खोलते ही उसका मोबाइल फोन हैक कर लेते थे। इसके बाद आरोपी कॉन्टैक्ट लिस्ट से घरवालों के नंबर हटाकर अपना नंबर सेव कर देते थे। फिर इसी नंबर से मेसेज भेजकर रकम ऐंठते थे।
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म्यूल खातों को करते थे इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम मंगवाने के लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल करते थे। ठगी की रकम को वे क्रिप्टोकरंसी में बदलते थे। इसके बाद क्रिप्टोकरंसी
को विभिन्न डिजिटल वॉलेट्स और प्लेटफॉर्म्स के जरिये स्थानांतरित करते थे। इससे रकम का वास्तविक स्रोत छिप जाता था। वे क्रिप्टोकरंसी को पी2पी सॉफ्टवेयर से बेचकर रकम हासिल करते थे। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
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एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि 5 मई को टीराज इंडस्ट्रीज के मालिक कुलवंत सिंह ने 18 लाख रुपये की साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी कंपनी के अकाउंट विभाग के व्हाट्सएप पर उनके बेटे का मेसेज मिला था। मेसेज के जरिये 18 लाख रुपये मांगे गए थे। विभाग ने धोखे में आकर रकम बताए गए खाते में स्थानांतरित कर दी। बाद में बेटे से बात करने पर ठगी का पता चला।
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एपीके फाइल भेजकर हासिल करते थे मोबाइल का एक्सेस
एडीसीपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने ठगी का तरीका बताया। वे लोगों को मालवेयर एपीके फाइल का लिंक व्हाट्सएप पर भेजते थे। पीड़ित के लिंक खोलते ही उसका मोबाइल फोन हैक कर लेते थे। इसके बाद आरोपी कॉन्टैक्ट लिस्ट से घरवालों के नंबर हटाकर अपना नंबर सेव कर देते थे। फिर इसी नंबर से मेसेज भेजकर रकम ऐंठते थे।
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म्यूल खातों को करते थे इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम मंगवाने के लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल करते थे। ठगी की रकम को वे क्रिप्टोकरंसी में बदलते थे। इसके बाद क्रिप्टोकरंसी
को विभिन्न डिजिटल वॉलेट्स और प्लेटफॉर्म्स के जरिये स्थानांतरित करते थे। इससे रकम का वास्तविक स्रोत छिप जाता था। वे क्रिप्टोकरंसी को पी2पी सॉफ्टवेयर से बेचकर रकम हासिल करते थे। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।