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मनरेगा में नहीं चलेगा रिश्तेदारों का ‘खेल’ : शासन ने पंजीकृत फर्मों की जांच के दिए आदेश
Mon, 28 Mar 2022 11:38 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
सचिन मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सचिन मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 28 Mar 2022 11:38 AM IST
सार
विभाग की जानकारी में आया है कि कुछ जिलों में क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष, खंड विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, सहायक लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर और ग्राम रोजगार सेवक अपने नजदीकी रिश्तेदारों के नाम से फर्म या कंपनी संचालित कर रहे हैं।
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मनरेगा
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मनरेगा में जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के रिश्तेदारों के नाम से पंजीकृत फर्मों की कुंडली खंगाली जाएगी। प्रदेश सरकार ने क्षेत्र पंचायत प्रमुख, ग्राम प्रधान व मनरेगा के अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से अपने रिश्तेदारों के नाम से फर्म या कंपनी बनाकर निर्माण सामग्री, स्टेशनरी, ईंधन और अन्य सामग्री आपूर्ति करने की जांच के आदेश दिए है। मनरेगा के अधिकारियों, कर्मचारियों के रिश्तेदारों के नाम से पंजीकृत फर्म से आपूर्ति बंद की जाएगी।
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ग्राम्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को मनरेगा में वेंडर के रूप में दर्ज पंजीकृत फर्म या कंपनी की पृष्ठभूमि की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मनरेगा में 60 फीसदी राशि मजदूरी और 40 प्रतिशत राशि सामग्री मद में खर्च होती है। हर जिले में प्रतिवर्ष सामग्री मद में करोड़ों रुपये की खरीद होती है। निर्माण सामग्री, स्टेशनरी, ईंधन, दीवार लेखन या फ्लैक्स प्रिंटिंग का कार्य वेंडर के जरिये कराया जाता है। वेंडर का पंजीकरण मनरेगा के पोर्टल पर किया जाता है।
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इसलिए देना पड़ा आदेश
विभाग की जानकारी में आया है कि कुछ जिलों में क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष, खंड विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, सहायक लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर और ग्राम रोजगार सेवक अपने नजदीकी रिश्तेदारों के नाम से फर्म या कंपनी संचालित कर रहे हैं। उन्हीं की कंपनी के जरिये सामग्री की आपूर्ति कर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान उठाया जाता है। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी जिलाधिकारियों को पोर्टल पर पंजीकृत फर्मों की जांच कराने के निर्देश दिए है।
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ये रिश्ते दायरे में आएंगे
अधिकारी या कर्मचारी के पिता, दादा, श्वसुर, चाचा, मामा, पुत्र, पौत्र, दामाद, भाई, भतीजा, भांजा, चचेरा भाई, ममेरा भाई, पत्नी का भाई, बहनोई, पति, पति का भाई, पति की बहन, पत्नी की बहन, पत्नी, पुत्री, पुत्रवधू, चचेरे या ममेरे भाई की पत्नी, सास और चाची।