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Lucknow News: धर्मांतरण के लिए कन्याकुमारी के चर्च से होती थी फंडिंग

Sat, 25 Jul 2026 02:35 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 02:35 AM IST
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Funding for religious conversion was routed through a church in Kanyakumari
पुलिस की गिरफ्त में धर्मांतरण के आरोपी एवं बरामद सामान।  - फोटो : स्रोत : पुलिस
लखनऊ। मोहनलालगंज के भरसवा गांव में हिंदुओं को ईसाई बनाने के आरोप में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सरगना डेनियल के खाते में हर माह दो से तीन लाख रुपये की फंडिंग कन्याकुमारी के एफजीपीसी चर्च से आती थी। इसी रकम से आरोपी ग्रामीणों को घरेलू सामान खरीदकर देता था। वह रुपयों का लालच देकर लोगों का धर्मांतरण कराता था। पुलिस ने 15 पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं।
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एडीसीपी साउथ रल्लापल्ली वंसथ कुमार के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ शिकायतकर्ता अमित कुमार की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई है। गिरोह में शामिल मूलरूप से तमिलनाडु और वर्तमान में हरिकंशगढ़ी में रहने वाले डेनियल, उसकी पत्नी सुबला, भरसवा निवासी चंद्रभान, उसकी पत्नी आरती, ठाकुरखेड़ा निवासी शीला, अजय रावत और भरसवा की सीमा को गिरफ्तार किया गया है। छानबीन में सामने आया है कि आरोपी अमित कुमार पर धर्मांतरण का दबाव बना रहे थे। उन पर चर्च चलने के लिए दबाव डालते थे। ये भी कहा था कि धर्म बदलने पर संतान की प्राप्ति होगी। अमित के इन्कार करने पर आरोपियों ने धमकाया था और बोला कि वे किसी से डरते नहीं हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वह लोगों को भड़काकर, लालच देकर और डराकर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं। अब तक की पड़ताल में आरोपियों ने भरसवा और आसपास के गांव के 60 लोगों का धर्म बदलने की बात स्वीकार की है।
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गरीब और बीमार लोग रहते थे निशाने पर
छानबीन में सामने आया है कि गिरोह ऐसे लोगों की तलाश करता था जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे लोगों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती थी जिनका इलाज चल रहा हो। पहले ऐसे लोगों के घर जाकर उन्हें आर्थिक मदद दी जाती थी। फिर धीरे-धीरे उनका ब्रेनवॉश किया जाता था। गिरोह विवाह आदि में भी लोगों को रुपये देकर अपने प्रभाव में लेता था।
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सिर्फ रात में ही करते थे बैठक
पुलिस ने 15 पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं। ग्रामीणों ने बताया है कि गिरोह के लोग अक्सर रात में चारपहिया वाहन से गांव-गांव जाते थे। चिह्नित लोगों के घर जाकर बैठक करते और उन्हें धर्मांतरण के लिए तैयार करते थे। कई बार बाहर से भी लोगों को बुलाया जाता था जो ग्रामीणों को नौकरी, रुपये और अन्य चीजों का प्रलोभन देते थे। एक पीड़ित ने बताया कि उसे घुटनों के दर्द के उपचार के नाम पर चर्च ले जाया गया था। बाद में ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया। पीड़ित ने जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपियों से उसका विवाद हो गया। पुलिस का कहना है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से प्रलोभन, कपटपूर्ण साधनों एवं मानसिक दबाव के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराता है।


बाला सुब्रमण्यम बन गया डेनियल, 28 साल से करा रहा था धर्मांतरण
पुलिस की पूछताछ में डेनियल ने बताया कि बचपन में उसका नाम बाला सुब्रमण्यम था। 16 वर्ष की आयु में उसकी मुलाकात सुबला से हुई जो कन्याकुमारी की थी। सुबला ईसाई धर्म को मानने वाली थी। सुबला से शादी करने के लिए उसके कहने पर बाला सुब्रमण्यम ने हिंदू धर्म त्यागकर ईसाई धर्म अपना लिया। इसके बाद सुबला ने उससे शादी की। आरोपी ने बताया कि एफजीपीसी चर्च कन्याकुमारी के आदेश पर वह धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए वर्ष 1998 में लखनऊ आया था। बीते 28 साल से वह धर्मांतरण का काम करा रहा था।


वाराणसी सर्किल का पास्टर है डेनियल
डेनियल ने यह भी खुलासा किया कि कन्याकुमारी के चर्च ने उसे वाराणसी सर्किल का पास्टर बना रखा था। चर्च से उसे और उसके साथियों को हर साल धर्मांतरण का टारगेट मिलता है। टारगेट पूरा करने के लिए चर्च सारी सुविधाएं देता है। आरोपी ने बताया कि उसे लोगों की बीमारी का इलाज कराने के बहाने उन्हें हिंदू से ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने के लिए कहा गया था। चर्च ने अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का लक्ष्य दिया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक बोलेरो, धार्मिक पुस्तक, धर्मांतरण से जुड़ी पुस्तकें, बैंक स्टेटमेंट और विवाह आदि से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।

पुलिस की गिरफ्त में धर्मांतरण के आरोपी एवं बरामद सामान। 

पुलिस की गिरफ्त में धर्मांतरण के आरोपी एवं बरामद सामान। - फोटो : स्रोत : पुलिस

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