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Lucknow News: गर्भनिरोधक की जानकारी पूरी, पर हिचक आ रही आड़े
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। केजीएमयू के अध्ययन में सामने आया है कि 18 से 24 वर्ष की युवतियों में गर्भनिरोधक विधियों की बुनियादी जानकारी तो पूरी है, लेकिन इन्हें अपनाने में हिचक अब भी बड़ी बाधा है। सभी 100 युवतियों ने कम से कम एक गर्भनिरोधक विधि के बारे में सुन रखा था, लेकिन 75 फीसदी के मन में इनके सही इस्तेमाल, साइड इफेक्ट और भविष्य की प्रजनन क्षमता पर असर को लेकर सवाल हैं। 59 फीसदी युवतियों ने मेडिकल स्टोर से गर्भनिरोधक खरीदने में हिचक की बात कही।
विश्व गर्भनिरोधक दिवस से पहले स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी अस्पताल) की डॉ. अंजू अग्रवाल ने अध्ययन के तथ्य साझा किए। यह अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अंजू अग्रवाल और नोडल ऑफिसर प्रो. डॉ. सुजाता देव की देखरेख में काउंसलर सौम्या सिंह ने किया। इसमें 18-24 वर्ष की 100 युवतियां शामिल थीं। इनमें 24 की उम्र 18-20 और 76 की 21-24 वर्ष थी।
अध्ययन में कंडोम सबसे अधिक परिचित गर्भनिरोधक विधि रही। वहीं 75 फीसदी युवतियों को इमरजेंसी पिल, ओरल पिल्स, कॉपर-टी और इंजेक्टेबल गर्भनिरोधक की जानकारी थी। विधि चुनते समय 35 फीसदी ने सुरक्षा और 33 फीसदी ने साइड इफेक्ट को सबसे अहम माना।
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ऑनलाइन जानकारी, लेकिन भ्रम भी
72 फीसदी युवतियां गर्भनिरोधक से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन सर्च या सोशल मीडिया से ले रही हैं। एआई का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, 58 फीसदी ने ऑनलाइन भ्रामक जानकारी मिलने की बात मानी। पिल्स से बांझपन या हर गर्भनिरोधक विधि से हार्मोनल असंतुलन जैसी धारणाएं भी सामने आईं।
प्राइवेसी की चिंता
मेडिकल स्टोर से खरीदने में हिचकने वाली 59 फीसदी युवतियों में 24 फीसदी ने प्राइवेसी की कमी और 14 फीसदी ने शर्मिंदगी को वजह बताया। 64 फीसदी ने कहा कि गोपनीय और यूथ फ्रेंडली सेवाएं उपलब्ध हों तो वे अधिक सहज महसूस करेंगी।
डॉ. अंजू अग्रवाल ने कहा कि बुनियादी जागरूकता अच्छी है, लेकिन प्रमाणिक जानकारी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी गर्भनिरोधक नियमित गर्भनिरोधक नहीं है और एचआईवी/एसटीआई से बचाव नहीं करता। स्कूल-कॉलेजों में नियमित काउंसलिंग की जरूरत भी बताई।
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विश्व गर्भनिरोधक दिवस से पहले स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी अस्पताल) की डॉ. अंजू अग्रवाल ने अध्ययन के तथ्य साझा किए। यह अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अंजू अग्रवाल और नोडल ऑफिसर प्रो. डॉ. सुजाता देव की देखरेख में काउंसलर सौम्या सिंह ने किया। इसमें 18-24 वर्ष की 100 युवतियां शामिल थीं। इनमें 24 की उम्र 18-20 और 76 की 21-24 वर्ष थी।
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अध्ययन में कंडोम सबसे अधिक परिचित गर्भनिरोधक विधि रही। वहीं 75 फीसदी युवतियों को इमरजेंसी पिल, ओरल पिल्स, कॉपर-टी और इंजेक्टेबल गर्भनिरोधक की जानकारी थी। विधि चुनते समय 35 फीसदी ने सुरक्षा और 33 फीसदी ने साइड इफेक्ट को सबसे अहम माना।
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ऑनलाइन जानकारी, लेकिन भ्रम भी
72 फीसदी युवतियां गर्भनिरोधक से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन सर्च या सोशल मीडिया से ले रही हैं। एआई का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, 58 फीसदी ने ऑनलाइन भ्रामक जानकारी मिलने की बात मानी। पिल्स से बांझपन या हर गर्भनिरोधक विधि से हार्मोनल असंतुलन जैसी धारणाएं भी सामने आईं।
प्राइवेसी की चिंता
मेडिकल स्टोर से खरीदने में हिचकने वाली 59 फीसदी युवतियों में 24 फीसदी ने प्राइवेसी की कमी और 14 फीसदी ने शर्मिंदगी को वजह बताया। 64 फीसदी ने कहा कि गोपनीय और यूथ फ्रेंडली सेवाएं उपलब्ध हों तो वे अधिक सहज महसूस करेंगी।
डॉ. अंजू अग्रवाल ने कहा कि बुनियादी जागरूकता अच्छी है, लेकिन प्रमाणिक जानकारी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी गर्भनिरोधक नियमित गर्भनिरोधक नहीं है और एचआईवी/एसटीआई से बचाव नहीं करता। स्कूल-कॉलेजों में नियमित काउंसलिंग की जरूरत भी बताई।