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रोहतास पर प्लाट का झांसा दे 36 लाख हड़पने का केस
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रोहतास पर प्लॉट के नाम पर 36 लाख रुपये हड़पने का आरोप, हजरतगंज कोतवाली में शिकायत
हजरतगंज कोतवाली में गोमतीनगर के वास्तुखंड निवासी विमल कुमार ने रोहतास कंपनी के प्रेसीडेंट परेश रस्तोगी समेत चार लोगों पर प्लॉट का झांसा देकर 36 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है।
इंस्पेक्टर राधारमण सिंह का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। ठगी के शिकार विमल कुमार ने बताया कि उन्होंने सुल्तानपुर रोड स्थित रोहतास कंपनी की टाउनशिप में 300 वर्ग गज का प्लॉट बुक कराया था।
कंपनी ने छह नवंबर 2012 को उनसे 30 महीने के भीतर पूरी तरह विकसित प्लॉट या रुपया लौटाने का इकरारनामा कराया। कंपनी के प्रेसीडेंट का कहना था कि इस अवधि में कंपनी डीजीपी व एलडीए की एनओसी समेत अन्य सरकारी औपचारिकताएं पूरी करा लेगी।
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हालांकि, उक्त अवधि बीत गई और कंपनी ने औपचारिकताएं पूरी कीं न ही प्लॉट विकसित करके दिया। विमल ने दौड़भाग की तो कंपनी ने 30 अप्रैल 2015 को उनसे 150-150 वर्ग गज के दो प्लाट का इकरारनामा किया।
दोनों प्लॉट की कीमत 48 लाख रुपये थी जिसे 300 वर्ग गज के प्लॉट के लिए जमा की गई रकम की मैच्योरिटी की राशि के रूप में एडजस्ट करने की बात कही गई थी। बकौल विमल, इस बीच पता चला कि सुल्तानपुर रोड टाउनशिप में किसी तरह का विकास कार्य नहीं हुआ है।
उन्होंने अपने मैच्योरिटी राशि अथवा प्लॉट देने को कहा तो कंपनी के अधिकारियों ने अभद्रता व गाली-गलौज करते हुए भगा दिया। वह प्रेसीडेंट परेश रस्तोगी से मिले तो उन्होंने दो-चार दिन में मैच्योरिटी राशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया।
इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया। कंपनी के ऑफिस के चक्कर लगाने पर उन्हें इंडियन ओवरसीज बैंक की राजभवन शाखा की 36 लाख रुपये के 12 चेक दिए जो बाउंस हो गए। इसके बाद विमल ने पुलिस की शरण ली।
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हजरतगंज कोतवाली में गोमतीनगर के वास्तुखंड निवासी विमल कुमार ने रोहतास कंपनी के प्रेसीडेंट परेश रस्तोगी समेत चार लोगों पर प्लॉट का झांसा देकर 36 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है।
इंस्पेक्टर राधारमण सिंह का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। ठगी के शिकार विमल कुमार ने बताया कि उन्होंने सुल्तानपुर रोड स्थित रोहतास कंपनी की टाउनशिप में 300 वर्ग गज का प्लॉट बुक कराया था।
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कंपनी ने छह नवंबर 2012 को उनसे 30 महीने के भीतर पूरी तरह विकसित प्लॉट या रुपया लौटाने का इकरारनामा कराया। कंपनी के प्रेसीडेंट का कहना था कि इस अवधि में कंपनी डीजीपी व एलडीए की एनओसी समेत अन्य सरकारी औपचारिकताएं पूरी करा लेगी।
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हालांकि, उक्त अवधि बीत गई और कंपनी ने औपचारिकताएं पूरी कीं न ही प्लॉट विकसित करके दिया। विमल ने दौड़भाग की तो कंपनी ने 30 अप्रैल 2015 को उनसे 150-150 वर्ग गज के दो प्लाट का इकरारनामा किया।
दोनों प्लॉट की कीमत 48 लाख रुपये थी जिसे 300 वर्ग गज के प्लॉट के लिए जमा की गई रकम की मैच्योरिटी की राशि के रूप में एडजस्ट करने की बात कही गई थी। बकौल विमल, इस बीच पता चला कि सुल्तानपुर रोड टाउनशिप में किसी तरह का विकास कार्य नहीं हुआ है।
उन्होंने अपने मैच्योरिटी राशि अथवा प्लॉट देने को कहा तो कंपनी के अधिकारियों ने अभद्रता व गाली-गलौज करते हुए भगा दिया। वह प्रेसीडेंट परेश रस्तोगी से मिले तो उन्होंने दो-चार दिन में मैच्योरिटी राशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया।
इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया। कंपनी के ऑफिस के चक्कर लगाने पर उन्हें इंडियन ओवरसीज बैंक की राजभवन शाखा की 36 लाख रुपये के 12 चेक दिए जो बाउंस हो गए। इसके बाद विमल ने पुलिस की शरण ली।