सचिवालय में सक्रिय ठगों ने एनजीओ संचालिका से परिवार के सदस्यों को नौकरी दिलाने के नाम पर ऐंठी रकम, एफआईआर दर्ज
प्रतिभा कुमारी ने बताया कि वह मूलरूप से बिहार के सिवान की हैं और यहां एल्डिको सिटी स्थित सुकृति अपार्टमेंट में रहती हैं। सिवान में सहेली निधि गुप्ता से पारिवारिक संबंध थे। उसका भाई रवि भारी वाहनों में रेडियम स्टीकर लगाता है। उसने दो साल पहले गोरखपुर निवासी मौसेरे भाई मोहित गुप्ता के बारे में बताया था। उसका कहना था कि मोहित राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध ब्यूरो उत्तर प्रदेश का चेयरमैन व प्रधानमंत्री जनकल्याणकारी योजना उत्तर प्रदेश का उपाध्यक्ष है। उसके यूपी, बिहार के बड़े राजनेताओं से करीबी संबंध हैं।
वह मंत्रियों, अधिकारियों के जरिये कई की सरकारी नौकरी लगवा चुका है। रवि ने वाराणसी के कोरौत सरवनपुर निवासी शिवधारी यादव व उनकी पत्नी डॉ. अमरावती देवी से भी मिलवाया। वह संकट मोचनसेवा सदन बच्चा केंद्र के नाम से क्लीनिक चलाती हैं। दोनों ने कई रिश्तेदारों की नौकरी लगवाने की बात कहते हुए फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाए, जिससे प्रतिभा को मोहित पर भरोसा हो गया।
बकौल प्रतिभा, उन्होंने चचेरी बहन कंचन भारद्वाज व भाई अरविंद, अभिषेक की नौकरी के लिए बात की। इसके लिए मोहित ने 45 लाख रुपये मांगे। प्रतिभा ने अलग तारीखों में रकम दे दी, लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिली। पूछने पर कहा कि डॉ. अमरावती से पांच लाख रुपये मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
राज्यमंत्री के नाम पर लिए 15 लाख रुपये
प्रतिभा का कहना है कि मोहित ने डॉ. अमरावती के बजाय बकाया पांच लाख वसूलने के लिए कथित राज्यमंत्री के पीआरओ किशन सिंह को उनके सिवान स्थित घर भेज दिया। वहां किशन ने उन्हें धमकाया और हंगामा शुरू कर दिया। लोकलाज के डर से उन्होंने उसे पांच लाख के जेवर दे दिए।
इसके बाद भी नौकरी नहीं मिली तो मोहित व रवि से संपर्क किया। दबाव बनाने पर मोहित ने वॉट्सएप पर फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिया। इस पर मोहित से संपर्क किया तो उसने, मां सुभद्रा, पत्नी तथा रवि, निधि ने गाली-गलौज और जानमाल की धमकी देना शुरू कर दिया।
प्रतिभा ने बताया कि 23 नवंबर 2019 को मोहित ने उसे लखनऊ सचिवालय बुलाया। वह पहुंची तो मोहित ने राज्यमंत्री मनीष गुप्ता का नाम लेते हुए 15 लाख रुपये मांगे। मोहित का कहना था कि नौकरी के लिए यह रकम राज्यमंत्री को देनी है। प्रतिभा ने उसे 15 लाख नकद दे दिए। इसके बाद मोहित ने उनसे इंदिरा भवन के सातवें तल पर स्थित अपने ऑफिस में आकर नियुक्ति पत्र लेने को कहा। हालांकि, इसके बाद उसने फोन उठाना बंद कर दिया।