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होमगार्ड के मस्टररोल में लाखों का गबन

Sun, 18 Apr 2021 01:19 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Apr 2021 01:19 AM IST
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fraud in masterrole of homegaurds
लखनऊ। होमगार्डों के मस्टररोल में फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये का गबन किया गया। यह फर्जीवाड़ा 11 साल पहले किया गया था। बाराबंकी जिला होमगार्ड कार्यालय से कुछ होमगार्डों को लखनऊ के हुसैनगंज थाने से सम्बद्ध किया गया था। इन होमगार्डों के मस्टररोल से छेड़छाड़ कर फर्जी बिल बाउचर बनाए गए थे। करीब साढ़े पांच लाख रुपये सरकारी खाते से साफ कर दिया गया था। इस मामले की जांच एंटी करप्शन की टीम ने की तो मामले का खुलासा हुआ। एंटी करप्शन की निरीक्षक अनुराधा सिंह की तहरीर पर हुसैनगंज थाने में जिला कमांडेंट सहित 21 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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बाराबंकी जिला होमगार्ड कार्यालय से कुछ होमगार्डों को लखनऊ के हुसैनगंज थाने में तैनाती के लिए भेजा गया था। इन होमगार्डों की तैनाती के दौरान बिल बाउचर बनाए गए। जनवरी 2010 से दिसंबर 2010 के बीच होमगार्ड स्वयंसेवकों के मस्टररोल बनाकर 11 लाख 27 हजार 135 रुपये सरकारी खाते से निकाले गए जबकि हुसैनगंज थाने के दस्तावेजों में यह रकम लगभग आधी यानी 5 लाख 78 हजार 982 रुपये ही दर्ज मिली। इसकी शिकायत होने पर जांच एंटी करप्शन से कराई गई। एडीजी एंटी करप्शन के निर्देश पर मामले की जांच एक विशेष टीम द्वारा की गई। निरीक्षक अनुराधा सिंह ने अपनी रिपोर्ट एडीजी को भेजी जिसमें 5 लाख 48 हजार 154 का फर्जी तरीके से भुगतान कराए जाने का मामला सही पाया गया।
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तैयार किए गए थे फर्जी कार्य दिवस
जनवरी से दिसंबर 2010 के बीच हुए इस फर्जीवाड़े की जांच जब एंटी करप्शन ने की तो सामने आया कि जिला कमांडेंट सहित 21 कर्मचारियों ने मिलकर यह फर्जीवाड़ा किया। इसमें 191 फर्जी मानव कार्य दिवस तैयार किए गए थे जिनके बदले में रकम का भुगतान किया गया था। यह फर्जी कार्य दिवस जांच अवधि के दौरान बाराबंकी और लखनऊ में तैनात होमगार्ड को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था।
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ये पाए गए घपले के दोषी
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन जिला कमांडेंट सुभाष राम, कनिष्ठ सहायक प्रदीप निगम, प्रशिक्षक लाल बहादुर, कंपनी कमांडर राजेंद्र प्रसाद शुक्ला, शिवकुमार, सुभाष चंद्र, राजेश कुमार, राजेश कुमार श्रीवास्तव, राजकुमार, चंद्रलता, विजेंद्र विक्रम सिंह, अवधेश नारायण मिश्र, अनिल कुमार पांडेय, अमर सिंह भगवती प्रसाद, सरन, रामचंद्र गिरीश चंद्र, भोला सिंह, शिवकुमार और रामसेवक समेत 21 को दोषी पाया गया। एंटीकरप्शन की निरीक्षक ने इन सभी के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़, कूटरचना, साजिश रचने और सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज कराया है।
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