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जालसाज दुर्गेश के चार साथी गिरफ्तार, पीजीआई पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सभी को भेजा जेल

Thu, 03 Sep 2020 10:36 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Mohit Mudgal Updated Thu, 03 Sep 2020 10:36 PM IST
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Four accomplices of fraudster Durgesh arrested, PGI police filed a case and sent all to jail
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

पीजीआई थानाक्षेत्र में गोरखपुर के उरूवा माट भताड़ निवासी हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने उसके चार साथियों को जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया है। प्रभारी निरीक्षक पीजीआई के के मिश्रा के मुताबिक, आरोपियों में एटा स्थित निजोर के फंफादू निवासी मानवेंद्र, उसका साथी सोवेंद्र यादव, गोरखपुर के गोला किशनपुर का निवासी संजीत कुमार और सहजनवा के तिलौरा का अभय कुमार है। मामले में बुधवार देर रात मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। सभी को जेल भेज दिया गया है। 

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डीसीपी चारू निगम के मुताबिक, समीक्षा अधिकारी अजय यादव के मकान से सचिवालय, स्कूलों, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई व रेलवे जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नौकरी दिलाने के अहम दस्तावेज मिले हैं। इसमें सर्विस बुक, आवेदन पत्र, नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र सहित कई दस्तावेज हैं। इसके अलावा दस विभागों की मुहर बरामद हुई। करीब 112 दस्तावेज नौकरी से संबंधित मिले हैं। पड़ताल में सामने आया कि पलक ठाकुर ने सचिवालय में कंप्यूटर ऑपरेटर व शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर 27 लाख रुपये नकद व पांच लाख रुपये खाते में दिए थे।
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पुलिस के मुताबिक, दुर्गेश यादव व उसके साथी तीन साल से नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने कुबूला कि 2017 से 2019 के बीच एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम दुर्गेश को दी गई थी। वह गोला निवासी राजेंद्र प्रसाद की कार से आया था। राजेंद्र भी जालसाज है। उसके खिलाफ विकासनगर थाने में जालसाजी का केस दर्ज है। मानवेंद्र ने समीक्षा अधिकारी का मकान छह महीने पहले किराए पर लिया था। मकान मालिक सप्ताह में एक बार आते थे।
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पिता का आरोप, दुर्गेश को फंसा रही पुलिस 
पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे उमाकांत ने बताया कि बेटा दुर्गेश सप्ताहभर पहले लखनऊ आया था। रुपये लेकर नौकरी लगवाने का आरोप निराधार है। आरोपियों को पुलिस अनुचित लाभ देना चाह रही है। कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार में दुर्गेश की पत्नी अनीता, बेटी आर्या और बेटा आरुष है। बताया कि मंगलवार को बेटे से मोबाइल पर बात हुई थी। उसने चार-पांच दिन में वापसी की बात कही थी।


पुलिस ने बेटे की फर्जी हिस्ट्रीशीट खोली थी। उन्हें हत्या के आरोपितों के बारे में जानकारी नहीं है। दुर्गेश का काम के सिलसिले में सचिवालय में आनाजाना था। उमाकांत ने बताया कि 11 अगस्त को आर्या के जन्मदिन पर दुर्गेश ने घर पर पार्टी की थी। दुर्गेश जुलाई में जेल से छूट कर आया था।

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