अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम: जीते जी कर्मचारियों को नहीं मिला चैन, अब मुफलिसी में जी रहा परिवार
अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम के मृतक आश्रितों को पड़े रोटी के लाले पड़ गए हैं। विभाग ने नहीं उनके हिस्से का ईपीएफ का पांच करोड़ रुपये नहीं जमा किया था। अब उन्हें न तो पेंशन मिल रही है और न ही ईपीएफ का भुगतान किया जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चौथे वेतनमान पर जिंदगी गुजारने वाले उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम के कर्मचारियों को बदहाली ने जीते जी चैन नहीं लेने दिया। उनके मरने के बाद अब परिवार मुफलिसी में है। विभाग ने कर्मचारियों के ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) की धनराशि पांच करोड़ रुपये जमा नहीं की। नतीजतन 16 सेवानिवृत्त और 7 मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को पेंशन नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं, कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण आदि विभागीय देनदारी के भुगतान का भुगतान भी नहीं हो रहा है। निगम पर इन 23 कर्मचारियों के बकाये कुल 2,58,68,452 रुपये बकाया है। नतीजतन सेवानिवृत्त कर्मियों व मृतक आश्रितों को रोटी के लाले पड़े हैं।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्तीय निगम की योजनाओं को वर्ष 1995 से प्रदेश में उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम क्रियान्वित कर रहा है। हालांकि अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए निगम से संचालित होने वाली टर्मलोन, स्वयं सहायता समूह, शैक्षिक ऋण, व्यवसायिक प्रशिक्षण योजना, वाहन ऋण योजना वर्ष 2007 से पूरी तरह से बंद है।
वर्तमान में निगम के कर्मचारियों को चौथा वेतनमान मिल रहा है। वर्ष 2014 से 21 के बीच निगम के सात कर्मचारियों का निधन हो गया। वहीं वर्ष 2015 से अब तक 17 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कर्मचारियों को ईपीएफ-95 के तहत पेंशन (वर्तमान में 2500-3000 रुपये प्रतिमाह तक) दिए जाने का प्रावधान है। मगर निगम ने कर्मचारी भविष्य निधि की धनराशि जमा नहीं की थी। इसकी वजह से सेवानिवृत्त कर्मचारी और मृतक आश्रितों को पेंशन नहीं मिल रही है।
यही नहीं सेवानिवृत्त कर्मचारी ग्रेच्युटी व अन्य मद के भुगतान के लिए विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। निगम को अपने जीवन के 32 साल देने वाले खुर्शीद अहमद बताते हैं कि चौथे वेतनमान की वजह से कर्मचारी पहले से ही बदहाली की जिंदगी गुजार रहे थे। अब उनको न पेंशन का सहारा है और न ही विभागीय देनदारी का भुगतान हो रहा है। उन्होंने बताया कि वाहन चालक नूर आलम वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनका निगम पर करीब सात लाख रुपये बकाया था। इसका भुगतान नहीं मिलने पर नूर आलम ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट के आदेश के बाद निगम ने उनको बकाये का भुगतान कर दिया। मगर बाकी कर्मचारी आर्थिक तंगी के चलते कोर्ट जाने की स्थिति में नहीं हैं।
उप्र अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम के प्रशासनिक अधिकारी मोहम्मद वलीम का कहना है कि निगम ने अपने मृत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के ईपीएफ और ग्रेच्युटी आदि के भुगतान के लिए शासन को पत्र भेजा है। धनराशि उपलब्ध होने के बाद उनका भुगतान किया जाएगा।