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Kanpur Encounter: पूर्व डीजीपी बोले- खाकी, खादी और अपराधी के गठजोड़ का सुबूत है कानपुर एनकाउंटर

Mon, 06 Jul 2020 12:20 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 06 Jul 2020 12:20 PM IST
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former DGP speak on kanpur encounter
प्रकाश सिंह - फोटो : amar ujala

कानपुर की घटना खाकी, खादी और अपराधी के गठजोड़ का सुबूत है। पूरा थाना विकास दुबे के इशारों पर चलता था। आपराधिक इतिहास की लंबी फेहरिस्त होने के बाद भी नेताओं के दबाव में कानपुर नगर के चौबेपुर थाने की पुलिस उसके आगे नतमस्तक रहती थी।

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यही वजह थी विकास का नाम न तो टॉप टेन अपराधियों की सूची में थाने स्तर पर था और न ही जिला, रेंज, जोन या मुख्यालय स्तर पर। इस घटना में चूक कहां-कहां हुई, क्या होना चाहिए था जो नहीं हुआ? एसओपी के पालन में क्या-क्या कमियां रहीं? इस संबंध में पूर्व के पुलिस महानिदेशकों के मत एक जैसे हैं।   
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हर कदम पर पुलिस ने दिखाई लापरवाही, बुनियादी बातें नजरअंदाज: प्रकाश सिंह 
1990 के दशक में धाकड़ डीजीपी के रूप में पहचान रखने वाले प्रकाश सिंह कहते हैं कि इस घटना में कदम-कदम पर पुलिस चूक करती रही। जिसका नतीजा आठ पुलिस कर्मियों की शहादत के रूप में सामने आया। विकास दूबे एक दिन पहले पुलिस कर्मियों का धमकी दे चुका था। उसका पूर्व का इतिहास मंत्री को थाने के अंदर मार देने का था।
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इसके बावजूद लापरवाही बरती गई। दबिश देने पूरी तैयारी के साथ नहीं गए। ऐसा लगता है पुलिस की ओर से असलहे का इस्तेमाल ही नहीं किया गया? पुलिस में भर्ती होते समय दिए गए प्रशिक्षण को पूरी तरह से नजर अंदाज किया गया। बुनियादी बातों का भी ख्याल नहीं रखा गया। विकास दूबे को खबर थी कि उसके यहां तीन थानों की फोर्स आ रही है लेकिन पुलिस को खबर नहीं थी कि उसके छापेमारी की खबर विकास दूबे को हो चुकी है।

पुलिस और अपराधी के रिश्तों पर चोट जरूरी: जावीद अहमद पूर्व डीजीपी 

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जावीद अहमद - फोटो : amar ujala
पुलिस के अपराधियों के साथ रिश्तों पर चोट जरूरी है। पुलिस और अपराधी के साथ जब नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं तो यह गठजोड़ और खतरनाक हो जाता है। तीनों एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं और एक दूसरे को आगे बढ़ाते हैं। हैरत की बात है जिसका तीस साल पुराना आपराधिक इतिहास रहा हो वह टॉप टेन की सूची में थाने स्तर पर ही न हो? कानपुर की घटना से लगता है कि पुलिस और अपराधी के बीच में कोई संधि थी। वह संधि टूटी जिसके बाद पुलिस दबिश देने पहुंची और अपराधी ने सूचना मिलने के बाद भी फरार होने के बजाए पुलिस पर आक्रमण कर दिया। 

कुख्यात को खुला छोड़ा, शुरू से अंत तक  पुलिस की चुप : एके जैन, पूर्व डीजीपी

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एके जैन - फोटो : amar ujala
इस मामले में शुरू से अंत तक पुलिस की चूक ही चूक है। इतने बड़े अपराधी को कानपुर पुलिस नजरअंदाज करती रही। पुलिस ने कुख्यात को खुला छोड़ रखा था। वह हत्याएं कर रहा था। जमीनें और ठेके हथिया रहा था। उस पर 71 गंभीर धाराओं के केस थे।

इसके बाद भी जिला तो दूर थाना के टॉप टेन में भी उसका नाम नहीं था। एक अपराधी को इतना क्यों बढ़ने दिया। मैंने बतौर सीओए एएसपीए एसपी या एसएसपी जहां भी चार्ज लिया। पहली ही रात बदमाशों, सटोरियों और लुटेरों के घर खुद दबिश देने जाता था। 

सिस्टम ने अपराधी का दिया साथ, फाइलें तक दबाईं: विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी  

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विक्रम सिंह - फोटो : amar ujala
विक्रम सिंह कहते हैं कि कानपुर की घटना खाकी, खादी ओर अपराधी के गठजोड़ का सबसे बड़ा सुबूत है। सिस्टम ने अपराधी का पूरा साथ दिया। विकास दूबे का गैंगेस्टर में चालान हुआ कुछ नहीं हुआ, रासुका में हुआ कुछ नहीं हुआ। उसने अपनी फाइलें दबवा दीं। यह सब इस लिए हुआ क्योंकि 25 हजार वोट इसकी जेब में थे।

जब थाने के अंदर मंत्री की हत्या के मामले में विकास बरी हुआ उस समय क्यों नहीं सोचा गया कि ऐसा कैसे हुआ? दबिश कहां देनी है इसकी सूचना अपनी फोर्स को भी पहले से नहीं दी जाती बल्कि उन्हें भ्रमित किया जाता है। जैसे जाना पूरब है तो बताना पश्चिम होता है। तीन लेयर में फोर्स लगाई जाती है। इसमें बाहरी क्षेत्र, अंदरूनी क्षेत्र और छतों पर कब्जा। बाहरी क्षेत्र में पुलिस लगाई जाती है ताकि कोई गांव से बाहर न जा सके और कोई अंदर न आ सके।
 
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