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पुलिस की थ्योरी पर पिता का सवाल, ढाई फीट के नाले में कैसे डूब गई तीन फुट की बच्ची?
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 29 Jun 2017 08:16 PM IST
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‘मेरी बेटी की लंबाई करीब तीन फुट थी। नाले में पानी करीब ढाई फुट गहरा है। आप ही बताइये, मेरी बिटिया उसमें डूबकर मर सकती है क्या?’ लखनऊ में ठाकुरगंज में नाले में मृत मिली पांच वर्षीय बच्ची के पिता ने संवाददाता से यह सवाल उठाए तो आसपास के लोगों ने उनका जोरदार समर्थन किया।
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पीड़ित परिवारीजनों ने बच्ची से अनहोनी होने और उसकी नाले में डूबोकर हत्या करने की बात कहते हुए पुलिस की थ्योरी को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले को दबाने की कोशिश में जुटी है।
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बच्ची के पिता ने कहा कि, ‘मेरा घर तो नाले के पास ही है। सुबह हो या शाम या फिर रात, बिटिया नाले के आसपास बेधड़क घूमती थी। उसे इलाके का चप्पा-चप्पा मालूम था। वह डूब नहीं सकती।’ पीड़ित पिता का इतना कहना था कि उनके घर पर मातमपुर्सी करने आई महिलाएं शोर मचाने लगीं।
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महिलाओं ने कहा कि उनके छोटे-छोटे बच्चे दिन-रात गली-सड़क पर खेलते हैं लेकिन कभी नाले में नहीं गिरे। और तो और बच्ची का डेढ़ साल का भाई जो अक्सर अकेले भटका करता था, वह भी नाले में नहीं गिरा।
बच्ची रोज उसकी अंगुली पकड़कर नाले के किनारे सड़क पर घुमाती थी। परिवारीजनों ने कहा कि पुलिस इस संवेदनशील मामले को हादसा बताकर रफा-दफा करने में जुट गई है।
पुलिस ने महिला और बाइक सवारों का नहीं लगाया पता
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- फोटो : डेमो पिक
बच्ची की मां ने कहा कि अगर वह नाले में गिरी होगी तो शोर मचाया होगा। हाथ-पैर मारे होंगे। ढाई फीट गहरे पानी में डूबना तो संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्ची को बेहोशी की हालत में नाले में फेंका गया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस उन दो बाइक सवार लड़कों और बच्ची को टॉफी खिलाने वाली औरत का पता लगाने की कोशिश क्यों नहीं कर रही। उस व्यक्ति से अभी तक संपर्क क्यों नहीं किया गया जिसने बच्ची को टॉफी खिलाते हुए एक महिला तथा बाइक से ले जाते दो लड़कों के साथ देखा था।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। पुलिस की कार्रवाई देखकर इलाकाई लोगों को भी निष्पक्ष जांच का भरोसा नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि मूलरूप से हरदोई निवासी युवक की पांच वर्षीय बेटी ईद की सुबह करीब नौ बजे संदिग्ध हालात में गायब हो गई थी।
इलाके में खबर फैली तो स्थानीय युवक ने बताया कि सुबह उसने एक महिला को बच्ची को टॉफी खिलाते देखा था। कुछ देर बाद बच्ची को बेसुध हालत में पैशन प्रो बाइक सवार दो लड़कों के बीच बैठकर जाते देखा था।
पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई लेकिन पुलिस ने बच्ची को टॉफी खिलाने वाली महिला और बाइक से ले जाने वाले युवकों की सच्चाई जानने में जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई।
मंगलवार सुबह बच्ची का शव घर से 200 मीटर दूर नाले में मिल गया था। एसएसपी दीपक कुमार का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची से रेप की बात सामने नहीं आई है। रिपोर्ट में उसकी मौत डूबने के कारण होने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस उन दो बाइक सवार लड़कों और बच्ची को टॉफी खिलाने वाली औरत का पता लगाने की कोशिश क्यों नहीं कर रही। उस व्यक्ति से अभी तक संपर्क क्यों नहीं किया गया जिसने बच्ची को टॉफी खिलाते हुए एक महिला तथा बाइक से ले जाते दो लड़कों के साथ देखा था।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। पुलिस की कार्रवाई देखकर इलाकाई लोगों को भी निष्पक्ष जांच का भरोसा नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि मूलरूप से हरदोई निवासी युवक की पांच वर्षीय बेटी ईद की सुबह करीब नौ बजे संदिग्ध हालात में गायब हो गई थी।
इलाके में खबर फैली तो स्थानीय युवक ने बताया कि सुबह उसने एक महिला को बच्ची को टॉफी खिलाते देखा था। कुछ देर बाद बच्ची को बेसुध हालत में पैशन प्रो बाइक सवार दो लड़कों के बीच बैठकर जाते देखा था।
पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई लेकिन पुलिस ने बच्ची को टॉफी खिलाने वाली महिला और बाइक से ले जाने वाले युवकों की सच्चाई जानने में जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई।
मंगलवार सुबह बच्ची का शव घर से 200 मीटर दूर नाले में मिल गया था। एसएसपी दीपक कुमार का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची से रेप की बात सामने नहीं आई है। रिपोर्ट में उसकी मौत डूबने के कारण होने की बात कही गई है।
रात तक नाला खंगालने पर नहीं मिली थी लाश
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बच्ची के परिवारीजनों को पुलिस ने बुधवार शाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट की ऐसी कॉपी दी जिसमें कुछ दिख ही नहीं रहा है। परिवारीजनों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें जाहिल और गंवार समझ रही है।
उन्हें जानबूझकर ऐसी फोटोकॉपी दी गई है जिससे पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखी बारीकियों को वह पढ़ और समझ न सकें। बच्ची के पिता ने कहा कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी लेकर अपने वकील के पास गए लेकिन वह भी कुछ समझ नहीं सका कि उसमें लिखा क्या है?
दरअसल पुलिस ने जो कॉपी दी है, वह अस्पष्ट है और कई जगह पर अक्षर गायब हैं अथवा कटे हुए हैं। इलाकाई लोग इसे पुलिस की साजिश मान रहे हैं। पीड़ित परिवारीजनों ने कहा कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट की साफ कॉपी हासिल करके वकील से उसकी पड़ताल कराने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे।
नाले में बच्ची के गिरने की थ्योरी से असहमत परिवारीजनों का कहना है कि ईद की दोपहर से शाम तक नाला खंगाला गया था लेकिन वहां कोई शव नहीं मिला था। ईद के मद्देनजर इलाके में चहल-पहल थी। रात तीन बजे तक लोग जाग रहे थे।
बच्ची के गायब होने से सरगर्मी भी थी। कुछ लोगों ने नाले में कूदकर कोना-कोना खंगाला था। अगर बच्ची नाले में गिरी होती तो उसका शव शाम को ही मिल जाता। बच्ची को रात तीन बजे के बाद अथवा मंगलवार सुबह नाले में फेंका गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का समय भी स्पष्ट नहीं है जिससे कुछ भी अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।
उन्हें जानबूझकर ऐसी फोटोकॉपी दी गई है जिससे पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखी बारीकियों को वह पढ़ और समझ न सकें। बच्ची के पिता ने कहा कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी लेकर अपने वकील के पास गए लेकिन वह भी कुछ समझ नहीं सका कि उसमें लिखा क्या है?
दरअसल पुलिस ने जो कॉपी दी है, वह अस्पष्ट है और कई जगह पर अक्षर गायब हैं अथवा कटे हुए हैं। इलाकाई लोग इसे पुलिस की साजिश मान रहे हैं। पीड़ित परिवारीजनों ने कहा कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट की साफ कॉपी हासिल करके वकील से उसकी पड़ताल कराने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे।
नाले में बच्ची के गिरने की थ्योरी से असहमत परिवारीजनों का कहना है कि ईद की दोपहर से शाम तक नाला खंगाला गया था लेकिन वहां कोई शव नहीं मिला था। ईद के मद्देनजर इलाके में चहल-पहल थी। रात तीन बजे तक लोग जाग रहे थे।
बच्ची के गायब होने से सरगर्मी भी थी। कुछ लोगों ने नाले में कूदकर कोना-कोना खंगाला था। अगर बच्ची नाले में गिरी होती तो उसका शव शाम को ही मिल जाता। बच्ची को रात तीन बजे के बाद अथवा मंगलवार सुबह नाले में फेंका गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का समय भी स्पष्ट नहीं है जिससे कुछ भी अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।