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Lucknow News: बैंक के पांच कर्मचारियों को कारावास
Fri, 29 Mar 2024 03:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 29 Mar 2024 03:11 AM IST
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लखनऊ। 30 साल पहले धोखाधड़ी करके षड्यंत्र के तहत बैंक को करोड़ों रुपये का चूना लगाने के आरोपी कानपुर के इलाहाबाद बैंक के तत्कालीन अधिकारी राधा रमण वाजपेयी, तत्कालीन विशेष सहायक गोपीनाथ टंडन समेत पांच को दोषी ठहराकर सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
कोर्ट ने राधारमण वाजपेयी को सात साल की कठोर कैद और दो लाख रुपये जुर्माना, रिकेश कुमार शुक्ल को पांच साल की कठोर कैद और डेढ़ लाख का जुर्माना तथा गोपीनाथ टंडन, संजय सोमानी और दीपक सोमानी को तीन-तीन साल के कठोर कारावास व एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
कोर्ट में सीबीआई की ओर से बताया कि जांच एजेंसी ने 29 अप्रैल 1994 को मामला दर्ज किया था। रिपोर्ट में राधारमण वाजपेयी, गोपीनाथ टंडन, संजय सोमानी, रिकेश कुमार शुक्ल और दीपक सोमानी को आरोपी बनाया गया था। बताया कि आरोपी संजय सोमानी ने अन्य के साथ षड्यंत्र रचा और धोखाधड़ी करके 27 मार्च 1992 से 16 जनवरी 1994 के बीच कानपुर के फीलखाना स्थित इलाहाबाद बैंक से 22 करोड़ 70 लाख प्राप्त किए। सारी रकम हड़प ली गई। सीबीआई ने विवेचना के बाद 29 मई 1998 को आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।
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कोर्ट ने राधारमण वाजपेयी को सात साल की कठोर कैद और दो लाख रुपये जुर्माना, रिकेश कुमार शुक्ल को पांच साल की कठोर कैद और डेढ़ लाख का जुर्माना तथा गोपीनाथ टंडन, संजय सोमानी और दीपक सोमानी को तीन-तीन साल के कठोर कारावास व एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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कोर्ट में सीबीआई की ओर से बताया कि जांच एजेंसी ने 29 अप्रैल 1994 को मामला दर्ज किया था। रिपोर्ट में राधारमण वाजपेयी, गोपीनाथ टंडन, संजय सोमानी, रिकेश कुमार शुक्ल और दीपक सोमानी को आरोपी बनाया गया था। बताया कि आरोपी संजय सोमानी ने अन्य के साथ षड्यंत्र रचा और धोखाधड़ी करके 27 मार्च 1992 से 16 जनवरी 1994 के बीच कानपुर के फीलखाना स्थित इलाहाबाद बैंक से 22 करोड़ 70 लाख प्राप्त किए। सारी रकम हड़प ली गई। सीबीआई ने विवेचना के बाद 29 मई 1998 को आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।
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