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बस्ती के करोड़ों के सड़क घपले में दी गई पहली चार्जशीट, नए तथ्य आ रहे सामने

Mon, 20 May 2019 12:22 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 20 May 2019 12:22 AM IST
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first charge sheet in basti road scam of crores of rupees
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
बस्ती में हुए करोड़ों रुपये के सड़क निर्माण घपले में पहली चार्जशीट दे दी गई है। यह चार्जशीट पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता वीके राम को दी गई है। इसके साथ ही जांच में रोज नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। 
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ऐसी सड़कों के निर्माण पर भी राशि खर्च हुई दिखाई गई है, जिनके लिए शासन ने कोई मंजूरी नहीं दी थी। इस घपले के दायरे में एक-एक एसई व एक्सईएन, दो एई और 17 जेई हैं। शेष सभी आरोपियों को भी जल्द ही चार्जशीट दे दी जाएगी।
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वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत शासन से की। शुरुआती जांच में ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं। 
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मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी से जांच कराई। इस कमेटी ने अपनी जांच में 40 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही इस धनराशि के एक बड़े हिस्से के गबन की आशंका से भी इनकार नहीं किया।

रिपोर्ट के आधार पर बस्ती के तत्कालीन एक्सईएन और वर्तमान में प्रांतीय खंड श्रावस्ती में तैनात आलोक रमन और दो एई विनय राम व अरविंद आर्या को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा 17 जेई के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए। 

बाद में शासन ने बांदा के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता दिवाकर शुक्ला को भी आरोप पत्र देने का फैसला किया। वर्तमान में वह मुख्य अभियंता, कानपुर के पद पर तैनात हैं। पीडब्ल्यूडी का कहना है कि शेष आरोपपत्र भी तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी आरोपियों को आरोपपत्र दे दिए जाएंगे। 

वहीं, विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। नियमानुसार शासन की मंजूरी से ही सड़कों का निर्माण किया जा सकता है, लेकिन बस्ती में बिना मंजूरी लिए ही सड़कों पर राशि खर्च कर दी गई। इनमें से कई सड़कें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हैं, इसलिए इसकी जांच भी मुश्किल है कि हकीकत में यह राशि खर्च हुई भी थी या नहीं। 

इसके अलावा बड़े पैमाने पर जिस सड़क के निर्माण के लिए बजट दिया गया था, उसके स्थान पर कोई दूसरी सड़क बना दी गई। इन सड़कों की गुणवत्ता भी बेहद खराब बताई जा रही है। इस बारे में संपर्क किए जाने पर जांच अधिकारी व प्रमुख अभियंता ग्रामीण, सड़क आरसी बरनवाल ने बताया कि आरोप पत्रों का जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
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