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संजीवनी देने की तैयारी: फिर से आबाद होंगे लखनऊ की पहचान रहे सिंगल स्क्रीन थियेटर, ये है पूरा प्लान

Mon, 27 Sep 2021 10:42 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 27 Sep 2021 10:42 AM IST
सार

लखनऊ में 16 सिंगल स्कीन थियेटर रहे हैं। ज्यादातर में अब ताले लटके हुए हैं। सरकार इन्हें संजीवनी देने की तैयारी कर रही है।

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Film development fund will provide help to single screen theatres in Lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

नाज, प्रभात, जगत, निशात, प्रकाश, अशोक, अंजुमन, माधव पैलेस, तुलसी, मेफेयर...ये उन सिनेमाघरों के नाम हैं, जो लखनऊ की शान हुआ करते थे। पर, अब महज लैंडमार्क बनकर रह गए हैं। हालांकि सबकुछ ठीक रहा तो इन सिनेमाघरों के दिन जल्द बहुरेंगे। इन्हें संजीवनी देने की तैयारी है। इसके लिए फिल्म डवलपमेंट फंड से मदद दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक दो करोड़ रुपये तक की आर्थिक मदद व बंद हो चुकी सब्सिडी फिर से शुरू की जाएगी।

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यूपी सिनेमा एग्जीबिटर्स फेडरेशन के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल बताते हैं कि प्रकाश, अलंकार, आनंद, प्रभात, नाज, जय भारत, गुलाब, प्रतिभा, अंजुमन सहित राजधानी में 16 सिंगल स्क्रीन थिएटर रहे हैं। इनमें ज्यादातर धीरे-धीरे बंद हो गए। जो बचे हैं, वहां भी ताले लग रहे हैं। आनंद सिनेमा को नया रूप दिया गया, पर वह भी बंद हो गया।
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प्रतिभा, नॉवेल्टी अलीगंज में चल रहे थे, पर अब वहां भी ताले लटके हुए हैं। साहू सिनेमा पीवीआर को दिया गया है। पूरे प्रदेश की बात करें तो मई, 2021 के आंकड़ों के अनुसार कुल 450 सिंगल स्क्रीन थिएटर में से करीब 70 ही ऑपरेट हो रहे हैं।
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बंद हो चले सिनेमाघरों को फिल्म डवलपमेंट फंड(एफडीएफ) से मदद देकर खड़ा करने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर मुहर लगने पर इन सिनेमाघरों को संजीवनी मिल सकती है। बहरहाल प्रस्ताव पर शासन के आला अधिकारी मंथन कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारी अभी आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं। पर, सूत्र बताते हैं कि महीने भर के भीतर फैसला हो सकता है।

क्या किया जा सकता है...

करोड़ों रुपये हैं एफडीएफ में
फिल्म डवलपमेंट फंड एफडीएफ के लिए सिनेमाप्रेमियों के टिकट से पैसा लिया जाता है। मसलन, हर टिकट पर पचास पैसे लिए जाते रहे हैं। आशीष अग्रवाल बताते हैं कि वर्षों से यह चार्ज लिया जा रहा है, लिहाजा इस मद में करोड़ों रुपये जमा हो चुके हैं। इसी मद से फिल्मों की शूटिंग करने वालों को सब्सिडी दी जाती है। इससे ही सिंगल स्क्रीन थिएटरों के भाग्य को बदला जा सकता है।

सब्सिडी दोबारा शुरू हो तो बने बात
सिंगल स्क्रीन थिएटर को पुनर्जीवित करने के लिए पहले जो प्लान बनाया गया था, उसके मुताबिक थिएटर की जगह मल्टीप्लेक्स बनाने पर पांच साल तक टैक्स में छूट मिलती थी। पर, वर्ष 2020 में इसे अचानक बंद कर दिया गया।

आशीष अग्रवाल बताते हैं कि इस सब्सिडी को दोबारा शुरू करवाने केलिए प्रपोजल दिया गया है। ऐसा होने पर सिंगल स्क्रीन के दिन संवर जाएंगे। इसके लिए शासन स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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