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Lucknow News: डायरिया का बढ़ रहा डर, मरीज बेहाल
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कैंप में दवा लेते लोग और इलाके में फैली गंदगी।
लखनऊ। जानकीपुरम और फैजुल्लागंज में डायरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। जानकीपुरम में ही 100 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं और दो मरीजों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बीमारी को गंभीरता से नहीं ले रहा। वह न तो ठोस वजह तलाश पाया और न ही पुख्ता इलाज की व्यवस्था कर सका है।
इलाके में डायरिया फैले दस दिन से ज्यादा हो चुके हैं। मौतें हो चुकी हैं, मगर स्वास्थ्य विभाग अब भी बीमारी से मौत मानने को तैयार नहीं है। विभाग अपने बचाव में अलग-अलग कारण गिनाने में जुटा है। यही नहीं, पानी की जांच एक बार कराई गई, जिसमें सब कुछ ठीक बताया गया। वह भी तब जब कुछ दिनों पहले इलाके की जांच के दौरान जलापूर्ति और सीवर की पाइपलाइन एक ही में जुड़ी हुई पाई जा चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगर पानी सुरक्षित है तो डायरिया फैला कैसे? अफसरों के पास इसका जवाब नहीं है।
इलाज से ज्यादा रेफर का खेल
प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ कैंप लगाकर खानापूर्ति की। मरीजों को दवा बांटी गई, लेकिन गंभीर मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किया जाता रहा। पहले कैंप, फिर ट्रॉमा सेंटर, उसके बाद साढ़ामऊ, सिविल या बलरामपुर अस्पताल। इस चक्कर में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की हालत बिगड़ रही है। ट्रॉमा सेंटर में संसाधन कम हैं, फिर भी गंभीर मरीजों को सीधे बड़े अस्पताल भेजने के बजाय उन्हें रेफर दर रेफर घुमाया जा रहा है। यही लापरवाही मरीजों की जान ले रही है।
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इलाके में बीमारी फैलने की साफ वजह अभी पता नहीं लगी है। जांच के दौरान पानी की गुणवत्ता ठीक मिली है। ऐसे में यह जांच कराई जा रही है, जो सैंपल लिए गए हैं वह किस स्थान से लिए गए हैं। बारिश में डायरिया के मामले आमतौर पर बढ़ते हैं। बीमारी की असल वजह तलाशी जा रही है।
डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ
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इलाके में डायरिया फैले दस दिन से ज्यादा हो चुके हैं। मौतें हो चुकी हैं, मगर स्वास्थ्य विभाग अब भी बीमारी से मौत मानने को तैयार नहीं है। विभाग अपने बचाव में अलग-अलग कारण गिनाने में जुटा है। यही नहीं, पानी की जांच एक बार कराई गई, जिसमें सब कुछ ठीक बताया गया। वह भी तब जब कुछ दिनों पहले इलाके की जांच के दौरान जलापूर्ति और सीवर की पाइपलाइन एक ही में जुड़ी हुई पाई जा चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगर पानी सुरक्षित है तो डायरिया फैला कैसे? अफसरों के पास इसका जवाब नहीं है।
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इलाज से ज्यादा रेफर का खेल
प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ कैंप लगाकर खानापूर्ति की। मरीजों को दवा बांटी गई, लेकिन गंभीर मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किया जाता रहा। पहले कैंप, फिर ट्रॉमा सेंटर, उसके बाद साढ़ामऊ, सिविल या बलरामपुर अस्पताल। इस चक्कर में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की हालत बिगड़ रही है। ट्रॉमा सेंटर में संसाधन कम हैं, फिर भी गंभीर मरीजों को सीधे बड़े अस्पताल भेजने के बजाय उन्हें रेफर दर रेफर घुमाया जा रहा है। यही लापरवाही मरीजों की जान ले रही है।
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इलाके में बीमारी फैलने की साफ वजह अभी पता नहीं लगी है। जांच के दौरान पानी की गुणवत्ता ठीक मिली है। ऐसे में यह जांच कराई जा रही है, जो सैंपल लिए गए हैं वह किस स्थान से लिए गए हैं। बारिश में डायरिया के मामले आमतौर पर बढ़ते हैं। बीमारी की असल वजह तलाशी जा रही है।
डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ

कैंप में दवा लेते लोग और इलाके में फैली गंदगी।

कैंप में दवा लेते लोग और इलाके में फैली गंदगी।

कैंप में दवा लेते लोग और इलाके में फैली गंदगी।

कैंप में दवा लेते लोग और इलाके में फैली गंदगी।

कैंप में दवा लेते लोग और इलाके में फैली गंदगी।