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शर्मनाक: मर गई मां तो लाश के साथ बच्ची छोड़ भागे घरवाले

Tue, 04 Aug 2015 02:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 04 Aug 2015 02:10 PM IST
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family members left newborn in hospital

क्वीन मेरी अस्पताल में सोमवार को एक मृत प्रसूता और नवजात बच्ची को छोड़कर उसके परिवारीजन भाग निकले। अस्पताल प्रशासन ने भर्ती के समय उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन पर कॉल की लेकिन वह स्विच ऑफ था।

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इस घटना का सबसे दु:खद पहलू ये रहा कि चंद घंटों पहले जन्म लेने वाली बच्ची के प्रति भी उनका दिल नहीं पसीजा। उसे भी परिवारीजन वहीं मौजूद किसी अनजान महिला को सौंपकर फरार हो गए। अस्पताल प्रशासन ने प्रसूता के शव को मॉर्च्युरी में रखकर पुलिस को सूचना दे दी है।
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केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग क्वीन मेरी में सोमवार सुबह 3.45 बजे हरदोई निवासी रिंकी को उसके परिवारीजनों ने गंभीर हालत में भर्ती कराया था। खून की कमी (एनीमिया) का शिकार रिंकी को प्रसव के दौरान रक्तस्राव होने लगा।
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इससे उसकी हालत और गंभीर हो गई थी। चिकित्सकों ने उसके इलाज का प्रयास किया लेकिन सुबह छह बजे रिंकी की मौत हो गई। इसके बाद परिवारीजन रिंकी की डेड बॉडी लेने की जगह वहां से लापता हो गए।

दवा लाने का बहाना करके भाग निकला

family members left newborn in hospital

इसी बीच पता चला कि एक नवजात बच्ची को भी कोई आरती नाम की मरीज के साथ देखरेख के लिए मौजूद महिला के पास छोड़ गया है। लगभग 80 वर्षीय इस महिला ने क्वीन मेरी प्रशासन को बताया कि एक व्यक्ति उसे बच्ची को देकर दवा लेने के लिए कहकर गया था।
 
लेकिन वह काफी देर तक लौटा नहीं। सुबह लगभग 9 बजे इसकी जानकारी वहां की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुजाता को मिली तो उन्होंने बच्ची का पता लगाया।
अस्वस्थ बच्ची को देखकर उन्होंने उसे तुरंत नियोनेटल केयर यूनिट में भर्ती कर फोटोथेरेपी करने के निर्देश दिए।
परिवारीजनों के फरार होने के बाद क्वीन मेरी प्रशासन ने रिंकी की डेडबॉडी को मॉर्च्युरी भेज दिया।

इसके बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि भर्ती रजिस्टर में लिखे पते के आधार पर परिवारीजनों की खोज कराई जा रही है।

उधर रिंकी की बच्ची को बचाने का जिम्मा नियोनेटल यूनिट में मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने उठाया। जेआर-टू डॉ. शशांक मिश्रा और स्टाफ नर्स पुनीता, दिलीप व शबीना ने बच्चे को भर्ती किया और दवाएं आदि की व्यवस्था की।

चिकित्सकों ने बताया कि जिस समय एनएनयू में बच्ची को भर्ती किया गया था उसका शरीर नीला पड़ चुका था। फोटोथेरेपी व अन्य दवाएं देने के कुछ घंटों बाद बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार हुआ।

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