लखनऊ पहुंची मेट्रो की एक फर्जी बोगी
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अभी तक टेंडर प्रक्रिया भी फाइनल नहीं हुई और सोशल मीडिया पर लखनऊ मेट्रो की बोगी की तस्वीर वायरल हो गई। एलएमआरसी ने इस बोगी का लखनऊ मेट्रो से कोई सरोकार होने से इन्कार किया है।
अफसरों का कहना है कि यह संभवत: दिल्ली मेट्रो की बोगी है। बोगी तो दूर की बात, लंबा समय बीतने के बाद भी अब तक इसकी टेंडर प्रक्रिया फाइनल नहीं हो सकी है। यह हाल तब है जब कंपनियों ने बोगी की सप्लाई के लिए 55 महीने के समय को काफी कम बताया है।
इसके बावजूद अब तक एलएमआरसी रोलिंग स्टॉक और सिग्नल सिस्टम के टेंडर को भी नहीं पूरा कर पाया है। ऐसे में परियोजना में देरी होने की पूरी आशंका है।
‘लखनऊ मेट्रो की पहली बोगी आ गई’ इस शीर्षक के साथ व्हाट्सएप और फेसबुक पर सुबह से ही मेट्रो की पहली बोगी की तस्वीर छाई रही। बोगी पूरी तरह से पॉलीथिन से ढकी हुई एक टेलर पर चढ़ाई गई है।
बोगी के आगे डीएमआरसी का लोगो
बोगी के ठीक आगे डीएमआरसी का लोगो स्पष्ट है, इसके बावजूद इसको लखनऊ मेट्रो की बोगी बताया जाता रहा। एलएमआरसी के जनसंपर्क अधिकारी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि, ये बोगी बिल्कुल भी लखनऊ मेट्रो की नहीं है।
हमारी तो अभी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। बड़ी कंपनियों की हां के बाद भी टेंडर फाइनल नहीं दुनिया की तीन बड़ी कंपनियों ने लखनऊ मेट्रो के लिए रोलिंग स्टॉक (इंजन,बोगी, ट्रैक) और सिग्नलिंग का टेंडर हासिल करने के लिए टेंडर भरा है।
इनमें से एक कंपनी अकेले और दो अपने सहयोगियों के साथ साझेदारी (कंसोर्टियम) में भी आई है। इनमें से एक कंपनी कोरियाई और एक चीनी कंपनी शामिल है।
एलएमआरसी के अधिकारियों का दावा है कि बहुत जल्द ही तकनीकी और वित्तीय परीक्षण करने के बाद इनमें से एक कंपनी या कंसोर्टियम को रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग का टेंडर दे दिया जाएगा।
यात्रियों की संख्या के साथ बढ़ती जाएगी ट्रेनें
रोलिंग स्टॉक को लेकर जो टेंडर किया गया है, वह भी सही दिशा में नहीं चल रहा है। पहले यह तय था कि 31 मार्च को टेंडर खुलेगा।
दो बार डेट बढ़ाई गई लेकिन अब तक तय नहीं हो पाया। लखनऊ मेट्रो का संचालन 20 ट्रेनों के जरिए किया जाएगा। प्रत्येक ट्रेन में चार पैसेंजर बोगी होंगी।
जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ती जाएगी। ट्रेनें भी बढ़ाई जाएंगी। प्राइमरी सेक्शन में संचालन के लिए कम से कम चार ट्रेनों और 16 बोगियों की आवश्यकता पड़ेगी।
कंपनियां इतने कम समय में इतना काम करने के लिए राजी नहीं हैं। रॉटेम कंपनी ने बीएम-2 और एनसाल्डो को साथ लेकर कंसोर्टियम बनाया है।
इसके अलावा चीनी कंपनी सीएसआर और बांबियार के कंसोर्टियम के अलावा एल्स्टॉन नाम की कंपनी ने भी रोलिंग स्टॉक का टेंडर डाला है। अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी ही नहीं की जा सकी है। करीब दो महीने बीते चुके हैं।