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मनरेगा में फर्जीवाड़ाः जिम्मेदार अफसरों से होगी चार गुना वसूली

Mon, 16 Sep 2019 03:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा महेंद्र तिवारी, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 16 Sep 2019 03:16 AM IST
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Fake money in MNREGA four times recovery from responsible officers
MANREGA

प्रदेश की योगी सरकार मनरेगा में पंचायतों के स्तर से सिटिजन इन्फॉर्मेशन बोर्ड (सीआईबी) की स्थापना के नाम पर करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए कई नए कदम उठाने जा रही है। 

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इसमें सीआईबी की स्थापना के लिए जवाबदेह खंड विकास अधिकारी व अन्य अधिकारियों से लागत की चार गुना रकम वसूला जाएगा। इसके अलावा सीआईबी लगाने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्थाओं के स्थान पर स्वयं सहायता समूहों को देने की तैयारी है। इसकी मॉनीटरिंग का मैकेनिज्म भी डेवलप किया जा रहा है।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मनरेगा योजना अंतर्गत कार्य के प्रारंभ होने के साथ ही कार्यस्थल पर सीआईबी की स्थापना जरूरी है। व्यक्तिगत लाभार्थीपरक कार्यों (शौचालय, आवास आदि) पर 3,000 रुपये और सामुदायिक कार्यों पर 5,000 रुपये प्रति कार्य सीआईबी लगाने में खर्च किए जा सकते हैं। 
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ग्राम्य विकास मंत्री मोती सिंह के निर्देश पर पिछले दिनों अपर आयुक्त मनरेगा योगेश कुमार ने प्रतापगढ़ जिले की कुंडा और गोंडा जिले के कटरा बाजार विकास खंड का निरीक्षण किया। वहां मनरेगा योजना से होने वाले विकास कार्यों में तमाम विसंगतियां सामने आने के साथ ही अधिकतर कार्यों में सीआईबी की स्थापना न किया जाना पाया गया। 

प्रदेश में वित्त वर्ष 2019-20 में मनरेगा योजना अंतर्गत करीब 10.58 लाख काम कराए गए। इन कार्यस्थल पर सीआईबी स्थापना पर 385 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लेकिन बड़ी संख्या में सीआईबी न लगाने की बात सामने आ रही है। इस वर्ष भी पिछले वर्ष के बराबर कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। ऐसे में इसी के आसपास रकम खर्च होने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष में 3.16 लाख काम कराए जा चुके हैं।

ग्राम्य विकास आयुक्त के. रविंद्र नायक ने इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सीआईबी न स्थापित करने पर लागत की चार गुना रकम कार्य से जुड़े अधिकारियों से तय अनुपात में वसूली जाएगी। कार्यप्रभारी, टीए/जेई, एपीओ, लेखाकार और खंड विकास अधिकारी सभी से 20-20 प्रतिशत हिस्सा वसूल किया जाएगा। 

नायक ने समस्त जिलाधिकारियों को यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। विभाग सीआईबी लगाने का अधिकार स्थानीय सहायता समूहों को देने की कार्ययोजना भी तैयार कर रहा है।

सीआईबी के लिए पिछले वित्तीय  वर्ष में 385 करोड़ का था बंदोबस्त

- वित्त वर्ष 2018-19 में 10,58,784 कार्य कराए गए।
- इसमें 68 प्रतिशत यानी 7,19,973 काम व्यक्तिगत कार्य से जुड़े थे। इन स्थानों पर 3000 रुपये प्रति सीआईबी की दर से 215 करोड़ 99 लाख 19 हजार रुपये निकाले जा सकते हैं।
- 32 प्रतिशत काम यानी 338811 काम सामूहिक हित से जुड़े थे। इन स्थानों पर 5000 रुपये प्रति सीआईबी की दर से 169 करोड़ 40 लाख 55 हजार रुपये खर्च किए जा सकते हैं।
- इस तरह पूरे प्रदेश में सीआईबी लगाने पर 385 करोड़ 39 लाख व 74 हजार रुपये खर्च किए जा सकते हैं।
- अब जांच में पता चल रहा है कि ज्यादातर स्थानों पर सीआईबी नहीं लगाए गए। तमाम स्थानों पर बिना लगाए पैसा निकाल लिया गया और कुछ जगह न तो बोर्ड लगाया गया और न ही पैसा निकाला गया।
- अब आयुक्त के निर्देश के बाद इस फर्जीवाड़े की पोल खुलने की संभावना है।

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