मोटापे से बचना है तो अधिक समय तक न रहें भूखे
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मोटापे के शिकार लोगों को कम से कम मात्रा में अनाज खाना चाहिए। अनाज अन्य अंगों के साथ लिवर को भी फैटी कर देता है। लिवर जरूरत से ज्यादा फैटी हो जाए तो इसका एकमात्र इलाज ट्रांसप्लांट ही होता है।
यह जानकारी बेंगलुरू के डॉ. एसएस सिकोरा ने एसजीपीजीआई में ‘रीऑपरेटिव जीआई सर्जरी’ विषय पर आयोजित वर्कशॉप के दूसरे दिन के सेशन में दी। उन्होंने बताया कि अगर फैटी लिवर का समय पर इलाज न हो तो यह लिवर सिरोसिस में बदल जाती है।
इसमें लिवर काम करना बंद कर देता है और सर्जरी से भी इलाज संभव नहीं होता। केवल ट्रांसप्लांट से मरीज की जान बचाई जा सकती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए मोटे लोगों को खानपान में काफी सावधानी बरतनी चाहिए।
खानपान में सुधार कर फैटी लिवर वाले लोग भी इसके फैट को कम कर सकते हैं। मोटे लोगों को अपनी डाइट में कम कार्बोहाइड्रेट युक्त तत्वों का सेवन करना चाहिए।
अनाज में कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होता है तो मोटे लोगों को ब्रेड, रोटी, चावल कम से कम मात्रा में खाना चाहिए। ऐसे लोगों को लिवर फैट कम करने के लिए अधिक प्रोटीनयुक्त तत्वों जैसे दालें, पनीर, सोयाबीन, मछली, चिकन का सेवन अधिक करना चाहिए।
पेट फूलने के साथ भूख न लगे तो हो जाएं सतर्क
डॉ. सिकोरा ने बताया कि अगर किसी को पेट फूलने, भूख न लगने, पैरों में सूजन, अचानक वजन का गिरना व चेहरे पर पिग्मेंटेशन जैसी समस्या हो तो सतर्क हो जाएं। यह लिवर की खराबी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
अगर ऐसी समस्याएं हैं तो मरीज को तुरंत डॉक्टर से परामर्श कर जांचें करानी चाहिए। डॉ. सिकोरा ने बताया कि देश में लिवर संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
इसमें कुछ बीमारियां तो दवाओं से ठीक हो जाती हैं, लेकिन अधिकतर में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। लिवर की समस्याओं का सबसे बड़ा कारण उसमें इंफेक्शन, स्मोकिंग व अधिक शराब का सेवन है।
साफ-सफाई न रखने से पैरासाइट्स लिवर तक जाकर इंफेक्शन कर देते हैं। इससे धीरे-धीरे लिवर में सिस्ट या ट्यूमर बन जाता है, जिसे सर्जरी के जरिए ही निकाला जा सकता है।
बैरिएट्रिक्स सर्जरी भी फायदेमंद
गुजरात से आए बैरिएट्रिक्स सर्जन डॉ. महेंद्र नरवारिया ने बताया कि देश में मोटापे की समस्या तेजी से फैल रही है। इस समय भी देश के करीब 4 करोड़ लोगों को बैरिएट्रिक्स सर्जरी की जरूरत है। अनियंत्रित रूप से बढ़ते मोटापे के लिए यही एकमात्र विकल्प होती है।
इसमें आमाशय के साइज को सर्जरी के जरिए काटकर छोटा कर देते हैं, जिससे मरीज को भूख कम लगती है। सर्जरी के बाद धीरे-धीरे वजन कंट्रोल में आने लगता है। लिवर फैटी होने का सबसे बड़ा व एकमात्र कारण मोटापा होता है।
ऐसे में समय रहते इस पर नियंत्रण जरूरी है। जोड़ों में दर्द, डायबिटीज, हाई कॉलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर व फैटी लिवर की समस्या वाले मरीजों का अगर वजन अधिक है और यह नियंत्रित नहीं हो रहा है तो उन्हें बिना देरी किए बैरिएट्रिक्स सर्जरी करा लेनी चाहिए। क्योंकि ऐसे मरीजों में मोटापे का बढ़ना जानलेवा हो सकता है।
सर्जरी के लिए चुनें अनुभवी डॉक्टर
डॉ. नरवारिया ने बताया कि बैरिएट्रिक्स सर्जरी काफी महंगी होती है। इसमें करीब पांच लाख रुपये का खर्च आता है। इस सर्जरी के लिए अच्छे डॉक्टर का चुनाव जरूरी है। क्योंकि अकसर देखा गया है सर्जरी कराने के बाद भी मरीज की परेशानी कम नहीं होती।
इसके बाद मरीज का वजन बढ़ना, सांस लेने में दिक्कत, बुखार रहने आदि जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इनका कारण सही तरीके से सर्जरी न किया जाना होता है।
डॉक्टर अकसर अनुभव की कमी से आमाशय का साइज बड़ा छोड़ देते है। जिससे सर्जरी के बाद भी वजन बढ़ता रहता है। इसके अलावा कम पैसों में सर्जरी करने के लिए डॉक्टर सिंगल यूज की स्टेपलर गन को बार-बार इस्तेमाल करते हैं।
इससे स्टेपल की गई जगह (जॉइंट) से लीकेज होने लगता है और मरीज में कॉम्प्लीकेशन बढ़ जाता है, जिससे उन्हें री-सर्जरी की जरूरत पड़ती है। दोबारा करीब 10 लाख रुपये का खर्च आता है, इसलिए जरूरी है कि सर्जरी अनुभवी डॉक्टर से ही कराएं।
साथ ही सर्जरी के बाद नियमित रूप से फॉलोअप के लिए डॉक्टर के पास जरूर जाएं। बैरिएट्रिक्स सर्जरी करानी है तो ओपेन के बजाए लैपरोस्कोपिक ही कराएं।